Yuva Haryana: हरियाणा के विश्वविद्यालयों में शोध को बढ़ावा देने के लिए स्थापित शोध पीठों की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। भास्कर एक्सप्लेनर की रिपोर्ट के अनुसार, कई विश्वविद्यालयों में शोध पीठों के लिए बजट जारी होने के बावजूद राशि का अपेक्षित उपयोग नहीं हो पाया। कुछ शोध पीठों को लंबे समय से बजट नहीं मिला है, जबकि कई जगह शोध पीठ स्थापित होने के बाद भी उनका कामकाज शुरू नहीं हो सका है।
महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में राशि जारी, खर्च बेहद कम
कैथल स्थित महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में शोध पीठ के लिए वर्ष 2025-26 में 11.19 लाख रुपये जारी किए गए, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार इसमें कोई राशि खर्च नहीं हुई।
इसी तरह सरस्वती सभ्यता शोध पीठ के लिए 11.40 लाख रुपये और भारतीय ज्ञान परंपरा शोध पीठ के लिए 31.40 लाख रुपये जारी किए गए। इनमें से भारतीय ज्ञान परंपरा शोध पीठ की राशि में सिर्फ 20 हजार रुपये खर्च किए गए।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 14 शोध पीठ, कई को वर्षों से बजट नहीं
रिपोर्ट के अनुसार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 14 शोध पीठ स्थापित हैं। इनमें से कुछ शोध पीठों को वर्ष 2010 के बाद से बजट नहीं मिला।
महर्षि कश्यप शोध पीठ की स्थापना की घोषणा वर्ष 2022 में की गई थी, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए बजट उपलब्ध नहीं कराया गया। विश्वविद्यालय की ओर से शोध पीठों के लिए प्रतिवर्ष करीब 50-50 हजार रुपये जारी किए जाने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय मीरपुर में 8 शोध पीठ
रेवाड़ी के इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर में आठ शोध पीठ स्थापित हैं। इनमें कुछ शोध पीठों की स्थापना वर्ष 2018 के आसपास हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय ने इन शोध पीठों के लिए सरकार से 62-62 हजार रुपये के बजट की मांग की है, जिसमें कार्यालय संबंधी खर्च भी शामिल है।
शोध पीठों के लिए भवन और स्टाफ की भी चुनौती
रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने शोध पीठों की स्थापना और संचालन में बजट के साथ-साथ भवन, रिसर्च स्टाफ और स्पष्ट कार्ययोजना की जरूरत पर जोर दिया है। कुछ मामलों में भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण शोध संबंधी गतिविधियां शुरू नहीं हो सकीं।
विशेषज्ञों के अनुसार विश्वविद्यालयों में शोध पीठ स्थापित करने के साथ उनके लिए पर्याप्त फंड, रिसर्च स्टाफ और जरूरी संसाधन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि शोध पीठों को पर्याप्त बजट नहीं मिलेगा तो उनके गठन का उद्देश्य कैसे पूरा होगा।
25-30 साल से शोध पीठों की फंडिंग में कमी का दावा
रिपोर्ट में विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया है कि पिछले 25-30 वर्षों से विश्वविद्यालयों में सरकारी फंडिंग में कमी आई है। राजनीतिक या अन्य कारणों से शोध पीठ स्थापित होने के बावजूद कई बार उनके लिए प्रोफेसर और स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाती।
विशेषज्ञ का कहना है कि शोध पीठ तभी प्रभावी हो सकती हैं जब संबंधित विभाग मजबूत हों, पर्याप्त स्टाफ हो और शोध के लिए नियमित फंड उपलब्ध कराया जाए।

