राजस्थान की सौर ऊर्जा से रोशन होगा हरियाणा, 5 हजार करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट पर काम तेज
Yuva Haryana: हरियाणा में बिजली आपूर्ति को मजबूत करने और राजस्थान में पैदा होने वाली सौर ऊर्जा को राज्य तक पहुंचाने के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये की मेगा परियोजना पर काम तेज हो गया है। इस परियोजना के तहत राजस्थान के बीकानेर स्थित सौर ऊर्जा क्षेत्र से हरियाणा और आसपास के इलाकों तक बिजली पहुंचाने के लिए नई ट्रांसमिशन लाइनें बिछाई जाएंगी। इससे हरियाणा के चार जिलों समेत पंजाब के कुछ क्षेत्रों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।
परियोजना के तहत सिवानी से जींद तक करीब 99.8 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन बनाई जाएगी। इस मार्ग पर लगभग 270 टावर लगाए जाने की योजना है। परियोजना पूरी होने पर हरियाणा में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और सौर ऊर्जा की आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
सिवानी से जींद तक बिछेगी 99.8 किलोमीटर लाइन
परियोजना के तहत सिवानी से जींद तक लगभग 99.8 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए करीब 270 टावर लगाए जाने का प्रस्ताव है। इस कॉरिडोर से भिवानी, हिसार और जींद जिलों के क्षेत्रों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
लाइन बिछाने के लिए किसानों की जमीन का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए किसानों से समझौते करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जींद जिले के जाजनवाला, ढांडीखेड़ा, खरड़ाखेड़ी और अंडकला गांवों के खेतों से भी यह लाइन गुजरने की योजना है।
परियोजना के तहत जींद के खटकड़ में पावर ग्रिड की क्षमता बढ़ाने की भी योजना है। इससे आसपास के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति बेहतर करने में मदद मिल सकती है।
बीकानेर के सौर ऊर्जा क्षेत्र से आएगी बिजली
राजस्थान के बीकानेर क्षेत्र में बड़े स्तर पर सौर ऊर्जा परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं। वहां उत्पादित बिजली को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने के लिए उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइनें जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ने वाली बिजली निकासी व्यवस्था तैयार की जा रही है।
बीकानेर के सिवानी क्षेत्र से करीब 765 किलोवोल्ट क्षमता वाली अति-उच्च दबाव की मुख्य ट्रांसमिशन लाइन निकाली जाएगी। इसके बाद बिजली को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए अन्य लाइनें बनाई जाएंगी।
इन लाइनों के निर्माण के लिए 400 केवी की डबल सर्किट ट्रांसमिशन लाइनें भी तैयार की जाएंगी। इनका उद्देश्य मुख्य लाइन से बिजली को संबंधित सबस्टेशनों तक पहुंचाना होगा। इससे सौर ऊर्जा को ग्रिड में शामिल करने और बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
हरियाणा के चार जिलों को मिलेगा फायदा
इस परियोजना का लाभ हरियाणा के भिवानी, हिसार, जींद और आसपास के क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है। ट्रांसमिशन नेटवर्क मजबूत होने से बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।
परियोजना के तहत जींद के खटकड़ में पावर ग्रिड की क्षमता बढ़ाई जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, इसके लिए 220 केवी क्षमता वाले पावर ग्रिड को मजबूत करने का काम किया जाएगा। इससे जींद जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों में बिजली पहुंचाने की क्षमता बढ़ सकती है।
इसके अतिरिक्त, राजस्थान के बीकानेर से हरियाणा के विभिन्न हिस्सों तक बिजली पहुंचाने के लिए अलग-अलग क्षमता वाली लाइनें तैयार की जाएंगी। इससे राज्य में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना है।
किसानों को जमीन की वैल्यू का 30 प्रतिशत मुआवजा
ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए किसानों की जमीन का इस्तेमाल होने के कारण मुआवजे का मुद्दा भी अहम है। किसानों को जमीन की तय वैल्यू का 30 प्रतिशत तक मुआवजा देने की व्यवस्था की गई है।
इसके अलावा, टावर लगाने और लाइन बिछाने से प्रभावित जमीन के लिए अलग-अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं। स्थानीय प्रशासन, बिजली परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों और किसानों के बीच बातचीत के जरिए मुआवजे तथा अन्य शर्तों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
संबंधित गांवों में किसानों से बातचीत जारी है। परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए जमीन से जुड़े मामलों का समाधान महत्वपूर्ण होगा।
बिजली आपूर्ति और सौर ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा
करीब 5,000 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्देश्य राजस्थान में उत्पादित सौर ऊर्जा को हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मजबूत नेटवर्क तैयार करना है। इससे न केवल बिजली की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को भी बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, परियोजना का वास्तविक लाभ निर्माण कार्य की समयसीमा, ट्रांसमिशन नेटवर्क की क्षमता और ग्रिड से जुड़ने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। फिलहाल सिवानी से जींद तक लाइन और संबंधित बिजली ढांचे को विकसित करने की तैयारी इस परियोजना का प्रमुख हिस्सा है।

