हरियाणा के 1100 स्कूल प्रिंसिपल सीखेंगे AI और साइबर सुरक्षा के गुर, आपदा प्रबंधन की भी मिलेगी ट्रेनिंग
Yuva Haryana: हरियाणा में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और स्कूल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने नई पहल की है। राज्य के करीब 1100 स्कूल प्रिंसिपल और क्लस्टर हेड को पांच दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, डिजिटल लीडरशिप और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों को नई तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी भी दी जाएगी।
प्रशिक्षण जिला स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। बदलती डिजिटल जरूरतों को देखते हुए शिक्षा विभाग स्कूल प्रमुखों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दे रहा है।
जिला स्तर पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण
प्रत्येक जिले में 21 से 25 अक्टूबर तक पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें स्कूल प्रिंसिपल और क्लस्टर हेड हिस्सा लेंगे। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्कूलों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना, प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को स्कूलों में तकनीक के इस्तेमाल, डिजिटल संसाधनों के प्रबंधन और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही स्कूलों में किसी आपात स्थिति से निपटने और आपदा प्रबंधन की तैयारी पर भी चर्चा होगी।
AI और साइबर सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
इस प्रशिक्षण का प्रमुख हिस्सा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सुरक्षा होगा। स्कूलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन संसाधनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रिंसिपल और स्कूल प्रमुखों को तकनीक के सुरक्षित तथा प्रभावी इस्तेमाल की जानकारी देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशिक्षण में AI के उपयोग, साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता, ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल संसाधनों से जुड़ी सावधानियों पर जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य स्कूल प्रबंधन को तकनीकी बदलावों के अनुरूप तैयार करना है, ताकि स्कूलों में डिजिटल गतिविधियों को अधिक व्यवस्थित ढंग से संचालित किया जा सके।
इसके अलावा, डिजिटल लीडरशिप और स्कूल प्रशासन से जुड़े विषयों पर भी व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संवेदनशीलता और स्कूल सुरक्षा की जानकारी भी मिलेगी
प्रशिक्षण में तकनीकी विषयों के साथ-साथ लैंगिक संवेदनशीलता, बाल संरक्षण और स्कूल सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी शामिल किया गया है। स्कूल प्रमुखों को बच्चों और महिला कर्मचारियों से जुड़े संवेदनशील मामलों को समझने तथा नियमों के अनुसार उचित कदम उठाने की जानकारी दी जाएगी।
इसके अंतर्गत स्कूलों में सुरक्षित वातावरण बनाए रखने, विद्यार्थियों की जरूरतों को समझने और संवेदनशील मामलों में जिम्मेदारी से काम करने पर जोर रहेगा। आपदा प्रबंधन से जुड़े सत्रों में भी स्कूल स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और आपात परिस्थितियों से निपटने की तैयारी पर चर्चा होगी।
इन विषयों पर भी दिया जाएगा प्रशिक्षण
प्रशिक्षण में स्कूल प्रबंधन और मूल्यांकन से संबंधित कई अन्य विषय शामिल हैं। इनमें स्कूल में AI का उपयोग, आईसीटी, डेटा प्राइवेसी, ऑनलाइन सुरक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, स्कूल-आधारित मूल्यांकन और डिजिटल लीडरशिप जैसे विषय शामिल हैं।
इन विषयों की जानकारी मिलने से प्रिंसिपल को स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने और शैक्षणिक गतिविधियों की निगरानी में मदद मिल सकती है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को संबंधित नियमों और व्यावहारिक प्रक्रियाओं से भी परिचित कराया जाएगा।
करनाल में 76 रोहतक में 37 प्रमुखों को प्रशिक्षण
करनाल में 76 स्कूल प्रमुखों को प्रशिक्षण देने की तैयारी है। हिसार में 68, यमुनानगर में 57, फतेहाबाद और जींद में 45-45, पलवल और झज्जर में 41-41 तथा रोहतक में 37 स्कूल प्रमुख इस कार्यक्रम का हिस्सा होंगे।
प्रशिक्षण में शामिल होने वाले स्कूल प्रमुखों की उपस्थिति अनिवार्य होगी। प्रशिक्षण के दौरान उनकी उपस्थिति दर्ज की जाएगी और सत्रों के अंत में प्री-टेस्ट तथा पोस्ट-टेस्ट भी कराया जाएगा। इससे प्रशिक्षण से पहले और बाद में प्रतिभागियों की जानकारी तथा समझ का आकलन किया जा सकेगा।
शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम
हरियाणा शिक्षा विभाग की यह पहल स्कूलों में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल और प्रबंधन क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। AI, साइबर सुरक्षा और डिजिटल नेतृत्व की जानकारी से स्कूल प्रमुखों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, प्रशिक्षण का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सीखी गई तकनीकों और प्रक्रियाओं को स्कूलों में किस तरह लागू किया जाता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पहल से स्कूल प्रशासन, विद्यार्थियों की सुरक्षा और डिजिटल शिक्षा की गुणवत्ता में कितना सुधार होता है।

