Yuva Haryana: हरियाणा की वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर 2026 को छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल की घोषणा की। सुधा यादव की नियुक्ति को हरियाणा के लिए अहम माना जा रहा है। वह महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद रह चुकी हैं और भाजपा के शीर्ष संगठन में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
सुधा यादव का राजनीतिक सफर संघर्ष, सार्वजनिक सेवा और संगठनात्मक अनुभव से जुड़ा रहा है। उनके पति सुखबीर सिंह यादव सीमा सुरक्षा बल (BSF) में डिप्टी कमांडेंट थे और कारगिल युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे। पति की शहादत के बाद सुधा यादव ने राजनीति में कदम रखा और वर्ष 1999 में पहली बार लोकसभा चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में पहचान बनाई।
1999 में महेंद्रगढ़ से जीता था लोकसभा चुनाव
डॉ. सुधा यादव ने वर्ष 1999 में भाजपा के टिकट पर महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने राव इंद्रजीत सिंह को हराकर संसद में जगह बनाई। यह उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
सुधा यादव ने 1999 से 2004 तक लोकसभा में महेंद्रगढ़ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2004 में फिर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत हासिल नहीं कर सकीं। वर्ष 2009 में उन्होंने गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़ा था। चुनावी सफलता नहीं मिलने के बावजूद वह भाजपा संगठन में सक्रिय रहीं और पार्टी की विभिन्न जिम्मेदारियां संभालती रहीं।
भाजपा संगठन में निभाईं अहम जिम्मेदारियां
सुधा यादव का राजनीतिक अनुभव केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने भाजपा के संगठन में भी कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। वर्ष 2015 में उन्हें भाजपा के ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई थी।
वर्ष 2019 से 2022 तक वह राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य रहीं। इसके बाद 17 अगस्त 2022 को उन्हें भाजपा के संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया। संसदीय बोर्ड पार्टी के प्रमुख निर्णय लेने वाले निकायों में से एक है।
उनकी नियुक्ति कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में ऐसे समय हुई है, जब वह भाजपा के केंद्रीय संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही थीं। अब वह संवैधानिक पद पर नई जिम्मेदारी संभालेंगी।
कारगिल युद्ध में पति हुए थे शहीद
सुधा यादव के जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ उनके पति सुखबीर सिंह यादव की शहादत रही। वह BSF में डिप्टी कमांडेंट थे और कारगिल युद्ध के दौरान देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। इसके बाद सुधा यादव ने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने का फैसला किया।
वर्ष 1999 में चुनाव लड़ने और जीत हासिल करने के बाद उन्होंने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी यात्रा को हरियाणा में संघर्ष के बाद सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ने के उदाहरण के तौर पर देखा जाता है।
छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति
राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, सुधा यादव के अलावा पांच अन्य राज्यों में भी नियुक्तियां और फेरबदल किए गए हैं। दुष्यंत गौतम को सिक्किम, ब्रज मोहन राम को ओडिशा और डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
वहीं, सिक्किम के मौजूदा राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल भेजा गया है, जबकि केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु की जिम्मेदारी दी गई है। ये नियुक्तियां संबंधित राज्यपालों के पदभार संभालने की तारीख से प्रभावी होंगी।
कर्नाटक में निभानी होगी संवैधानिक जिम्मेदारी
राज्यपाल राज्य में संविधान के अनुसार कामकाज सुनिश्चित करने वाले प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारी होते हैं। उनकी जिम्मेदारियों में राज्य सरकार और राजभवन के बीच संवैधानिक समन्वय, विधानसभा से संबंधित प्रक्रियाएं और संविधान के तहत निर्धारित अन्य कार्य शामिल हैं।
डॉ. सुधा यादव की नियुक्ति के साथ हरियाणा से जुड़ी एक वरिष्ठ राजनीतिक नेता को दूसरे राज्य में संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है। अब उनकी नई भूमिका पर नजर रहेगी। हालांकि, राज्यपाल का पद राजनीतिक गतिविधियों से अलग संवैधानिक मर्यादाओं के तहत काम करने की अपेक्षा रखता है।
हरियाणा की राजनीति से संसद और भाजपा के शीर्ष संगठन तक पहुंचने के बाद सुधा यादव का कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में नियुक्त होना उनके सार्वजनिक जीवन का एक नया अध्याय है।

