हरियाणा होमगार्ड भर्ती पर सवाल, ACB ने 2016 से 2026 तक का रिकॉर्ड मांगा; वेलफेयर फंड की भी होगी जांच
Yuva Haryana: हरियाणा में होमगार्ड विभाग की भर्ती प्रक्रिया और वेलफेयर फंड में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच तेज हो गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने विभागीय मुख्यालय से नवंबर 2016 से सितंबर 2026 तक का रिकॉर्ड तलब किया है। जांच में भर्ती बंद होने के बावजूद कुछ लोगों को ड्यूटी पर लगाए जाने, अधिकारियों की भूमिका और होमगार्ड जवानों के वेतन से वेलफेयर फंड के नाम पर की जाने वाली कटौती जैसे मुद्दों की पड़ताल की जाएगी।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नवंबर 2016 के बाद भर्ती प्रक्रिया बंद होने के बावजूद वर्ष 2022 तक कुछ लोगों को कथित तौर पर बैकडोर तरीके से नौकरी दी गई। शिकायतकर्ता ने भर्ती नियमों, नियुक्तियों और फैसले लेने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
2016 से 2026 तक का रिकॉर्ड मांगा
ACB ने हरियाणा होमगार्ड विभाग के मुख्यालय से नवंबर 2016 से सितंबर 2026 तक की भर्तियों और संबंधित दस्तावेजों का रिकॉर्ड मांगा है। जांच के दायरे में भर्ती प्रक्रिया, नामांकन, अधिकारियों की भूमिका, विभागीय फैसलों और गठित समितियों से जुड़े दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि भर्ती बंद होने के बाद भी यदि किसी व्यक्ति को ड्यूटी पर लगाया गया, तो ऐसा किन नियमों और आदेशों के तहत किया गया। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि नियुक्तियों या नामांकन के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं।
इस मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच का अहम हिस्सा होगी। रिकॉर्ड की जांच के आधार पर यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जाएगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
वेलफेयर फंड की कटौती पर भी सवाल
मामले का दूसरा प्रमुख पहलू होमगार्ड जवानों के ड्यूटी भत्ते से वेलफेयर फंड के नाम पर की जाने वाली कटौती है। यह कटौती वर्ष 1967 से किए जाने की बात सामने आई है। शुरुआत में यह राशि 40 रुपये थी, जो बाद में बढ़कर 300 रुपये तक पहुंच गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2024 से सेवानिवृत्त होने वाले जवानों के लिए यह राशि 31,631 रुपये से अधिक होने की बात कही गई है। इस फंड की कटौती और जमा राशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
शिकायत में यह जानने की मांग की गई है कि जवानों के वेतन या ड्यूटी भत्ते से काटी गई राशि का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से किया गया। इसके साथ ही अब तक जमा कुल रकम, फंड के संचालन और खर्च का पूरा हिसाब सामने लाने की मांग भी की गई है।
खर्च और नियमों की जांच होगी
ACB की जांच में वेलफेयर फंड से जुड़ी वित्तीय जानकारी और विभागीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जाएगी। इसमें यह देखा जा सकता है कि फंड की राशि किन मदों में खर्च की गई, क्या उसका इस्तेमाल निर्धारित नियमों के अनुसार हुआ और क्या जमा रकम का पूरा लेखा-जोखा उपलब्ध है।
राष्ट्रीय होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारी और शिकायतकर्ता कर्मचारी ने भी मामले में दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी या नियमों के उल्लंघन के प्रमाण मिलते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
होमगार्ड जवानों की नजर जांच पर
इस मामले में होमगार्ड जवानों और विभाग से जुड़े कर्मचारियों की नजर अब जांच के नतीजों पर है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, नियुक्तियों के नियमों का पालन और वेलफेयर फंड का सही इस्तेमाल ऐसे मुद्दे हैं, जिनका सीधा संबंध कर्मचारियों के हितों से है।
फिलहाल ACB द्वारा रिकॉर्ड मांगे जाने के बाद दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की दिशा तय होगी। आरोपों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और संबंधित रिकॉर्ड की पुष्टि के बाद ही निकाला जा सकेगा।

