Yuva Haryana : हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए राज्य सरकार ने निगरानी व्यवस्था को और अधिक सख्त करने का फैसला किया है।
इस बार हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के माध्यम से अतिरिक्त निगरानी की जाएगी। अब केवल आग की संख्या ही नहीं, बल्कि आग की तीव्रता, जले हुए क्षेत्रफल और धुएं का भी आकलन होगा।
पराली जलाने की जानकारी प्राप्त होने के 12 घंटे के अंदर नोडल अधिकारी को अपनी रिपोर्ट देनी होगी। संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से निगरानी की जाएगी।
पराली जलाने की घटनाओं पर नज़र रखने के लिए निगरानी व्यवस्था में बदलाव किया गया है। अब आग की घटनाओं की गिनती के साथ-साथ आग की तीव्रता, जले हुए क्षेत्रफल और धुएं का भी आकलन किया जाएगा।
नोडल अधिकारी मौके पर पहुंचकर आग, धुएं, स्थल की स्थिति और अन्य संबंधित जानकारी ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम के माध्यम से दर्ज करेगें। रिपोर्ट में देरी और लापरवाही होने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जुर्माने का प्रावधान
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दो एकड़ तक जमीन में पराली जलाने पर पांच हजार रुपये, दो से अधिक और पांच एकड़ तक जमीन में पराली जलाने पर 10 हजार रुपये तथा पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाने पर 30 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
पराली जलाने की पुष्टि होने पर संबंधित किसान की मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर रेड एंट्री की जा सकती है। रेड एंट्री होने पर संबंधित किसान एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर अपनी फसल नहीं बेच पाएंगे। इसके अलावा एफआईआर दर्ज करने का भी प्रावधान है।
नोडल अधिकारियों की होगी जवाबदेही
राज्य में पराली जलाने की निगरानी के लिए 8283 में से 8090 नोडल अधिकारी तैनात किए जा चुके हैं। 15 सितंबर से निगरानी शुरू हो गई है। हर एक नोडल अधिकारी की ओर से आगामी चार से सात बजे तक आग से जुड़े मामलों का ब्यौरा उपलब्ध कराया जाएगा।
ब्यौरा के आधार पर अगले दिन सुबह 9 से 10 बजे तक नोडल अधिकारियों को संबंधित मामलों पर कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट नहीं देने या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पराली जलाने की घटनाओं पर कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी सख्ती की जा रही है। वर्ष 2023 से रेड एंट्री का प्रावधान किया गया है। किसानों के खिलाफ एफआईआर और चालान की कार्रवाई 2021 से शुरू है।
वर्ष 2024 में लापरवाही बरतने वाले नोडल अधिकारियों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए।
वर्ष 2025 में 16 नोडल अधिकारियों को निलंबित किया गया तथा 287 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
पराली जलाने के मामलों में आई कमी
हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के आंकड़ों के अनुसार पराली जलाने के मामलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान बदलाव देखने को मिला है।
2021 में कुल 3626 पराली जलाने के मामले दर्ज हुए थे, तो वहीं 2022 में 2641 मामले, 2023 में 1373 मामले, 2024 में 1406 मामले और 2025 में 662 मामले दर्ज हुए थे।
3 बजे से रात 10 बजे तक अतिरिक्त निगरानी
गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों के अनुसार संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निर्देशों के तहत दोपहर तीन बजे से रात 10 बजे तक अतिरिक्त निगरानी की जाएगी।

