सोनीपत की DCRUST यूनिवर्सिटी में ‘काली दिवाली’ मनाएंगे कर्मचारी, एक सप्ताह में मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन धरना
Yuva Haryana: हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST) में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय के कर्मचारी कुलपति के कामकाज से नाराज हैं और उन्होंने इस साल दिवाली को ‘काली दिवाली’ के रूप में मनाने का ऐलान किया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर देंगे।
दीनबंधु छोटूराम कर्मचारी यूनियन (DCREU) ने राज्य सरकार से विश्वविद्यालय में नियमित कुलपति की तत्काल नियुक्ति करने की मांग की है। यूनियन का आरोप है कि मौजूदा कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह को सरकार की ओर से कार्यकाल विस्तार दिए जाने के बाद विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुआ है। कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय में कई फैसलों और नियुक्तियों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है।
नियमित कुलपति की नियुक्ति की मांग
यूनियन के प्रधान सुरेश कुमार पुथी ने 5 नवंबर को कहा कि राज्य सरकार ने कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह का कार्यकाल अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस विस्तार के बाद विश्वविद्यालय के कामकाज में अव्यवस्था बढ़ी है।
यूनियन अध्यक्ष के अनुसार, कुलपति का ध्यान विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों के बजाय अपने कार्यकाल को आगे बढ़वाने पर अधिक है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार ने कार्यकाल विस्तार के दौरान कुलपति को बड़े नीतिगत फैसले लेने से रोक रखा है। ऐसे में विश्वविद्यालय के महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं।
कर्मचारियों ने मांग की है कि सरकार जल्द नियमित कुलपति की नियुक्ति करे, ताकि विश्वविद्यालय का कामकाज सामान्य और पारदर्शी तरीके से चल सके।
प्रशासनिक नियुक्तियों में पक्षपात का आरोप
यूनियन ने विश्वविद्यालय में प्रशासनिक नियुक्तियों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सुरेश कुमार पुथी ने आरोप लगाया कि नियुक्तियों और महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती के दौरान पक्षपात किया जा रहा है। उनका दावा है कि प्रशासन की चापलूसी करने वाले कर्मचारियों को अहम जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जबकि दूसरे कर्मचारियों की अनदेखी हो रही है।
यूनियन अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि एक डिप्टी सुपरिंटेंडेंट को कुलपति कार्यालय में स्थानांतरित करने की कोशिश की गई थी, लेकिन रजिस्ट्रार कार्यालय ने इस पर रोक लगा दी। ये सभी आरोप कर्मचारी यूनियन की ओर से लगाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आने पर इस मामले में स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति के नियम की अनदेखी का आरोप
कर्मचारी यूनियन ने पर्यावरण संबंधी सरकारी दिशा-निर्देशों के पालन पर भी सवाल उठाए हैं। यूनियन का कहना है कि सरकारी निर्देशों के अनुसार कार्यालयों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति रखी जानी थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन कथित तौर पर सभी कर्मचारियों की हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए उपस्थिति रजिस्टर की जांच करवा रहा है।
कर्मचारियों ने इसे सरकारी दिशा-निर्देशों के विपरीत बताया है। यूनियन का आरोप है कि इससे कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है।
अकाउंट्स ब्रांच के कर्मचारियों को परेशान करने का आरोप
यूनियन अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय की अकाउंट्स ब्रांच में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि शाखा के कर्मचारियों को बिना उचित कारण परेशान किया जा रहा है।
इसके अलावा, विश्वविद्यालय के स्विमिंग पूल को लेकर भी प्रशासन पर सवाल खड़े किए गए हैं। यूनियन के अनुसार, इस सुविधा के निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन पिछले तीन वर्षों से इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है। कर्मचारियों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताया है।
एक सप्ताह का अल्टीमेटम, फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन
कर्मचारी यूनियन ने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी मांगों पर कार्रवाई करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। यूनियन का कहना है कि यदि इस अवधि में नियमित कुलपति की नियुक्ति और अन्य मुद्दों पर संतोषजनक कदम नहीं उठाए गए तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर देंगे।
इससे पहले भी DCRUST में गैर-शिक्षक कर्मचारी अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। सितंबर 2026 में कर्मचारियों ने रोष मार्च निकालकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था। उस समय डीसी रेट कर्मचारियों की सेवा अवधि बढ़ाने, लंबित वेतन, प्रमोशन, एसीपी और आवास आवंटन जैसे मुद्दे उठाए गए थे।
अब दिवाली से पहले ‘काली दिवाली’ के ऐलान ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कर्मचारियों के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता है तो त्योहार के दौरान विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन आंदोलन की स्थिति बन सकती है।

