अंबाला में लापता सैनिक की पत्नी को 19 साल बाद मिली राहत, 2007 में ट्रेन सफर के दौरान गायब हुए थे सेना के लांस नायक; तमिलनाडु पुलिस ने आठ साल बाद दर्ज की जीरो FIR
Yuva Haryana: देश की रक्षा के लिए सीमा पर तैनात रहने वाले एक सैनिक के परिवार को अपने ही पति की तलाश में करीब दो दशक तक सरकारी दफ्तरों और पुलिस थानों के चक्कर काटने पड़े। तमिलनाडु में ट्रेन से सफर के दौरान लापता हुए सेना के लांस नायक के मामले में आखिरकार 19 साल बाद FIR दर्ज हुई है। लंबे इंतजार के बाद हुई इस कार्रवाई से सैनिक की पत्नी को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।
अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन के पास 12 जुलाई 2007 को ट्रेन से लापता हुए लांस नायक के मामले में तमिलनाडु पुलिस ने आठ साल बाद जीरो FIR दर्ज की थी। इसके बाद भी मामला आगे बढ़ने में लंबा समय लग गया। आखिरकार 22 मार्च 2026 को तमिलनाडु में जीरो FIR दर्ज कर मामले को अंबाला जीआरपी थाने तक पहुंचाया गया।
12 जुलाई 2007 को ट्रेन से लापता हुए थे लांस नायक
लांस नायक टी. सत्यनारायण सेना में तैनात थे। वह अपनी यूनिट के साथ पंजाब लौट रहे थे। 12 जुलाई 2007 की रात ट्रेन अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन के आसपास पहुंची, तभी वह लापता हो गए। उनके साथियों ने उनकी तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल पाया।
सैनिक के लापता होने की खबर मिलने के बाद परिवार ने उन्हें खोजने की कोशिश शुरू की। उनकी पत्नी ने उम्मीद नहीं छोड़ी और लगातार संबंधित अधिकारियों से संपर्क करती रहीं। लेकिन इतने वर्षों तक मामले में ठोस प्रगति नहीं होने से परिवार को मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पत्नी ने 19 साल तक की तलाश
सैनिक की पत्नी टी. सत्यनायकी ने पति का पता लगाने के लिए लंबे समय तक प्रयास किए। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने मामला उठाया, लेकिन उन्हें बार-बार इंतजार करना पड़ा।
परिवार के लिए सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि पति के लापता होने के बाद उनकी स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी। इस कारण परिवार न तो मामले को सामान्य रूप से आगे बढ़ा पा रहा था और न ही कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पा रहा था।
पेंशन के लिए भी करना पड़ा संघर्ष
पति के लापता होने के बाद पत्नी को आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने वर्ष 2018 में पेंशन के लिए आवेदन किया था। हालांकि, सेना के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी सैनिक को कानूनी रूप से मृत घोषित करने की प्रक्रिया पूरी होने और संबंधित नियमों का पालन किए बिना पेंशन प्रक्रिया आगे बढ़ाना आसान नहीं है।
इस वजह से परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं। पति की तलाश के साथ-साथ उन्हें आर्थिक सहायता के लिए भी लगातार प्रयास करने पड़े। सैनिक के लापता होने के करीब 12 साल बाद भी परिवार को राहत नहीं मिल सकी थी।
तमिलनाडु पुलिस ने दर्ज की जीरो FIR
मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए तमिलनाडु पुलिस ने जीरो FIR दर्ज की। जीरो FIR का मतलब है कि किसी संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर पुलिस अपने थाना क्षेत्र की सीमा की परवाह किए बिना प्राथमिकी दर्ज कर सकती है। बाद में मामले को जांच और आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित थाने को भेजा जा सकता है।
22 मार्च 2026 को जीरो FIR दर्ज करने के बाद इसे अंबाला जीआरपी थाने तक पहुंचाया गया। इससे मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुला है।
अब परिवार को न्याय की उम्मीद
करीब 19 साल तक अपने पति की तलाश करती रही महिला के लिए FIR दर्ज होना एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, प्राथमिकी दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि मामले का अंतिम समाधान हो गया है। अब जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सैनिक किन परिस्थितियों में लापता हुए थे और उनके साथ क्या हुआ।
इस मामले ने एक बार फिर लापता व्यक्तियों की जांच में देरी, विभिन्न राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय और परिवारों को समय पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत को सामने रखा है। परिवार को उम्मीद है कि अब जांच में तेजी आएगी और लंबे समय से अनुत्तरित सवालों के जवाब मिल सकेंगे।

