हरियाणा में 1,149 जवानों वाला SDRF गठित, बाढ़-भूकंप और बड़े हादसों में संभालेगा मोर्चा
Yuva Haryana: हरियाणा में प्राकृतिक आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में 1,149 सदस्यीय राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। इस विशेष बल का उद्देश्य बाढ़, भूकंप, आग, इमारत गिरने और अन्य गंभीर हादसों के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों को तेजी से पूरा करना है। इससे आपात स्थिति में प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तायुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने 5 नवंबर को इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत गठित यह बल प्रदेश की आपदा प्रबंधन क्षमता को मजबूत करेगा। सरकार की योजना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में प्रशिक्षित कर्मियों की विशेष टीम उपलब्ध रहे, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर कार्रवाई कर सके।
आपदा के समय राहत और बचाव की जिम्मेदारी
हरियाणा में बाढ़, जलभराव, आग लगने, इमारत ढहने और औद्योगिक दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं के दौरान कई विभागों को एक साथ काम करना पड़ता है। ऐसे में पुलिस, जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच समन्वय बेहद जरूरी होता है।
नए SDRF के गठन से इस व्यवस्था को अधिक संगठित बनाने में मदद मिलेगी। बल की प्रमुख जिम्मेदारियों में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियान चलाना, फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना, जरूरतमंदों तक राहत पहुंचाना और प्रभावित आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शामिल होगा।
सरकार का उद्देश्य आपदा के शुरुआती समय में ही प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है, क्योंकि किसी भी बड़े हादसे में शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
1,149 पदों वाला होगा विशेष बल
हरियाणा के गृह विभाग ने SDRF की एक पूरी बटालियन के लिए 1,149 पदों को मंजूरी दी है। इस बल को विशेष प्रशिक्षण, आवश्यक उपकरण और आपदा प्रबंधन से जुड़ी सुविधाओं से लैस करने की योजना है।
इससे पहले जनवरी 2026 में सरकार ने SDRF की स्थापना की दिशा में काम तेज करने की जानकारी दी थी। उस समय अधिकारियों ने बल के बुनियादी ढांचे, कर्मचारियों की तैनाती, विशेष प्रशिक्षण और संचालन व्यवस्था पर चर्चा की थी। एक बटालियन में अग्निवीरों को शामिल करने की योजना पर भी विचार किया गया था।
अब गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद इसके संचालन और संसाधनों को विकसित करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। केवल पदों की मंजूरी से बल पूरी तरह सक्रिय नहीं हो जाता। इसके लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती, उपकरणों की उपलब्धता और नियमित अभ्यास भी जरूरी होंगे।
पहले से प्रशिक्षित हैं 594 पुलिसकर्मी
हरियाणा के पास आपदा प्रबंधन के लिए पहले से प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों का आधार मौजूद है। जनवरी 2026 में सामने आई जानकारी के अनुसार, IRB भोंडसी की पहली बटालियन को आपदा प्रतिक्रिया के लिए नोडल इकाई के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
इस इकाई के 594 पुलिसकर्मियों को ढही हुई इमारतों में खोज एवं बचाव, बाढ़ में रेस्क्यू और रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल तथा परमाणु आपात स्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया था।
इसके अलावा प्रदेश के चारों मंडलों में क्विक रिस्पांस टीम (QRT) तैनात करने की योजना भी पहले सामने आई थी। ऐसी टीमें संवेदनशील परिस्थितियों में शुरुआती कार्रवाई करने और जरूरत पड़ने पर SDRF के साथ समन्वय बनाने में मदद कर सकती हैं।
आपदा प्रबंधन अधिनियम में संशोधन के बाद मिला आधार
राज्य आपदा मोचन बल के गठन का कानूनी आधार आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 में वर्ष 2025 में किए गए संशोधन से मजबूत हुआ। संशोधित प्रावधानों के तहत राज्य सरकारों को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना जारी करके अपना SDRF गठित करने का अधिकार दिया गया है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्यों को अपनी भौगोलिक परिस्थितियों और आपदा संबंधी जरूरतों के अनुसार विशेष बचाव बल तैयार करने का अवसर देना है। हरियाणा में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, औद्योगिक गतिविधियों और शहरी विस्तार को देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
NDRF के साथ भी रहेगा समन्वय
राज्य स्तर पर SDRF बनने के बाद भी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की भूमिका बनी रहेगी। बड़ी और गंभीर आपदाओं के दौरान NDRF राज्य सरकार की मदद करता है। दोनों बलों के बीच प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी और बचाव अभियानों में समन्वय आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बना सकता है।
हरियाणा में SDRF के गठन को आपातकालीन तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बल की बटालियन कितनी जल्दी पूरी तरह तैयार होती है और आपदा के समय कितनी तेजी से राहत एवं बचाव अभियान चला पाती है।

