Yuva Haryana: सरकारी महाविद्यालयों में नियमित लेक्चरर्स और प्रिंसिपल्स के तबादलों को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार ने तबादला प्रक्रिया की तैयारी शुरू कर दी है, जिसके दायरे में उन प्रोफेसरों और लेक्चरर्स को लाया गया है जो पिछले 5 साल या उससे अधिक समय से एक ही कॉलेज में जमे हुए हैं। इस नई प्रक्रिया के लागू होने से वर्षों से एक ही स्टेशन पर काम कर रहे लेक्चरर्स को अब दूसरे स्टेशन पर जाना होगा और नए माहौल में काम करना होगा।
मुख्य बिंदु:
अनिवार्य तबादला प्रक्रिया: एक ही स्टेशन पर पांच साल या उससे अधिक समय पूरा कर चुके प्रोफेसरों और लेक्चरर्स के लिए इस तबादला प्रक्रिया में भाग लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
तबादला नीति और आवेदन प्रक्रिया: हायर एजुकेशन की तबादला नीति के तहत 26 अक्टूबर को आवेदन के लिए पोर्टल खोला गया था और नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए थे। लेक्चरर्स से कम से कम तीन पसंदीदा स्टेशनों के विकल्प मांगे गए थे, जिसकी अंतिम तिथि 30 अक्टूबर थी।
कपल केस और विशेष छूट: तबादला नीति के अनुसार, पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने की स्थिति (कपल केस) में पात्र प्रोफेसरों को 10 अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। वहीं, जिन प्रोफेसरों की सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) में 18 महीने या इससे कम समय बचा है, उन्हें इस तबादला नीति से छूट दी गई है।
सिरसा के कॉलेजों पर प्रभाव: हरियाणा गवर्नमेंट कॉलेज एसोसिएशन के जिला प्रधान सुरेंद्र कुमार के अनुसार, अकेले राजकीय नेशनल कॉलेज, सिरसा में 65 नियमित लेक्चरर्स हैं, जिनमें से कम से कम 60 लेक्चरर इस तबादला नीति के दायरे में आ रहे हैं और इससे प्रभावित होंगे।
अधिकारियों के बयान: राजकीय महिला कॉलेज, सिरसा के प्रिंसिपल शत्रुजीत कपूर ने बताया कि तबादला के लिए विकल्प भरवाने हेतु नोडल अधिकारी लगाए गए हैं और पांच साल तक एक ही स्टेशन पर कार्यरत लेक्चरर इसके दायरे में आते हैं।

