Yuva Haryana : हरियाणा में धान खरीद के दौरान हुई गड़बड़ियों पर अब लगातार कार्रवाई का सिलसिला जारी है। करनाल और यमुनानगर में जहां अधिकारियों को पर गाज गिर रही है तो वहीं घोटाले की जांच की आंच अब आढ़तियों तक भी पहुंच गई है।
दरअसल, फर्जी तौर पर पीआर धान खरीद को सरकारी कागजों में गड़बड़ी करके दर्शाया गया था। करनाल में करीब 20 करोड़ रुपए के सरकारी धान के घोटाले के मामले में हैफेड के चार अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
इन चार अधिकारियों में असंध सेंटर के मैनेजर एवं परचेजर प्रमोद कुमार, निसिंग मंडी के परचेजर दर्शन सिंह, गोहाना मंडी की मैनेजर रीना और सोनीपत की कासंडी मंडी के परचेजर जोगिंदर सिंह का नाम शामिल है।
वहीं करनाल के एक आढ़ती को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। पुलिस जांच के मुताबिक यह आरोपी फर्जी तौर पर धान की खरीद करने में शामिल रहा। आढ़ती पर आरोप है कि बिना धान की खेती करने वाले किसानों के खाते में भी धान खरीद के पैसे डलवाए गए। किसानों के बयान पर ही इस पर कार्रवाई हुई। वहीं अन्य आढ़तियों पर भी जांच जारी है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार इन सभी पर फर्जी तरीके से धान खरीद कर भ्रष्टाचार करने का आरोप है। पीआर धान खरीद करके सरकारी कागजों में दिखाया गया और धान की अलॉटमेंट भी असंध के अग्रवाल और राधे-राधे राइस मिल में दिखाई गई।
करीब 9 करोड़ के इस फर्जीवाड़े में इन आरोपियों से पहले असंध मंडी के परचेजर अशोक कुमार, मैनेजर सुरेंद्र सिंह और डीएम रहे अमित को भी निलंबित किया जा चुका है। आपको बता दें कि करनाल में करोड़ों रुपए के धान घोटाले में छह थानों में अलग-अलग केस दर्ज किए हुए है।
उधर, यमुनानगर में भी करीब 75 करोड़ रुपए का बड़ा धान घोटाला उजागर हुआ है। इस मामले में अभी तक एक राइस मिलर की गिरफ्तारी हुई है। वहीं हैफेड के चारों कर्मचारी सस्पेंड किए जा चुके है। मार्केट कमेटी के पांच सचिवों को चार्जशीट किया गया है।
वहीं अंबाला में 70 मीट्रिक टन धान कम मिलने की भी चर्चा है। नग्गल के एक राइस मिल में यह धान कम मिला। इसकी कीमत करीब 17 लाख रुपए बताई जा रही है। हालांकि, इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई की सूचना सामने नहीं आई है।



