Yuva Haryana : हरियाणा में फिलहाल ट्रांसफर नहीं हो रहे है, लेकिन इसके बावजूद भी अनेक अधिकारी और कर्मचारी मंत्रियों और अफसरों की पावर से खूब इधर-उधर हो रहे है।
पंचायती विभाग में एडिशनल चार्ज के सहारे अधिकारियों व कर्मचारियों को ट्रांसफर होने जैसा फायदा मिल रहा है। यानी कि अपनी मनमर्जी के स्थान पर अतिरिक्त प्रभार ले रहे हैं।
एक प्रमुख समाचार पत्र ने दावा किया है कि ऐसा भी तब हो रहा है, जब विभाग की ओर से स्पष्ट आदेश जारी किए गए है कि ऑनलाइन ट्रांसफर ड्राइव के मद्देनजर खासकर ग्राम सचिव और जेई आदि की अतिरिक्त तौर पर लगाई ड्यूटी तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दी गई है।
आपको बता दें कि ट्रांसफर की पावर मुख्यमंत्री के पास होती है। वे प्रशासनिक सचिव की सिफारिश पर कभी भी किसी के ट्रांसफर की मंजूरी दे सकते है। ऐसे में ट्रांसफर तो विभाग में नहीं हो रहे है, लेकिन एडिशनल चार्ज देकर अधिकारियों-कर्मचारियों को दूसरी जगह जरूर भेजा जा रहा है।
इसमें एक खास बात यह भी है कि यह मामला सीएमओ तक भी नहीं जा रहा है, क्योंकि एडिशनल चार्ज मंत्री और निदेशक स्तर पर ही दिए जा रहे है।
अब सवाल यह है कि विभाग की 18 नवंबर से माडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसके बावजूद एडिशनल चार्ज दिया जा रहा है।
खबर में यह भी दावा किया गया है कि एडिशनल चार्ज को लेकर विभाग में भीतरखाने ही सवाल भी उठ रहे है। ऐसे अनेक अधिकारी और कर्मचारी है, जो रोक के बावजूद एडिशनल चार्ज का फायदा उठा रहे है।
वहीं मंत्री कृष्ण लाल पंवार का कहना है कि वे व्यवस्था के अनुसार ही एडिशनल चार्ज देते हैं और ये उनकी पॉवर भी हैं।
दूसरी तरफ, पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा ने दोहरे चार्ज के खिलाफ है। उन्होंने 6 मई को अधिकारियों की बैठक में इसके बारे में स्पष्ट आदेश दिए थे। उनका कहना था कि जिस एरिया में अधिकारियों को अतिरिक्त जार्च दिए गए हैं, वे कई बार दोनों स्थानों पर ही नहीं मिलते।



