Yuva Haryana : हरियाणा में दो खिलाड़ियों की मौत के बाद अब सरकार ने खेल सिस्टम को सुधारने के लिए भागदौड़ शुरू कर दी है।
पहले जहां खेल का नाम आते ही देश में हरियाणा का नाम सबसे पहले आता था, लेकिन खिलाड़ियों की मौत के बाद प्रदेश की खेल व्यवस्था की खासा किरकिरी हो रही है।
ऐसे में अब यह लग रहा है कि अगर हरियाणा के खेल सिस्टम के साथ खेल होने की बजाय खेल व्यवस्था पर असल में काम होता तो खेल जगत में हरियाणा न जाने कितना ही आगे होता।
चलो… वापस ताजा मुद्दे पर आते है। दरअसल, खिलाड़ियों की मौत के मामले में हरियाणा का खेल विभाग अब नींद से जाग गया है। खेल मंत्री गौरव गौतम ने सभी जिला खेल अधिकारियों के साथ पंचकूला में करीब साढ़े तीन घंटे तक बैठक की है।
बैठक में हर जिले में सुविधाओं और खामियों को लेकर सवाल-जवाब हुए है। खेल मंत्री ने कहा कि जिला खेल परिषदों के पास पूरा बजट है और इससे सुविधाएं बढ़ाई जाए।
एक खबर यह भी है कि इस बैठक में रोहतक में खिलाड़ी की मौत के बाद सस्पेंड किए गए जिला खेल अधिकारी भी थे, जिनसे पूरी जानकारी ली गई।
हरियाणा के खेल मंत्री ने अब दावा किया है कि तीन माह में मरम्मत के सभी काम पूरे कर लिए जाएंगे।
मंत्री ने पंचायत, नगरपालिका, नगरपरिषद और एचएसवीपी के अंडर आने वाले खेल मैदानों, स्टेडियमों और उपकरणों की पूरी जांच रिपोर्ट मांगी है। फैसला यह भी लिया गया है कि जिन स्टेडियमों की हालात खराब है, अब वहां खिलाड़ी अभ्यास नहीं करेंगे। अगर फिर भी कोई लापरवाही सामने आई तो संबंधित जिला अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
खेल मंत्री का कहना है कि राज्य के खेल ढांचे के वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए विभाग द्वारा मैदानों और स्टेडियमों को ग्रेड-ए, बी, सी और डी में वर्गीकृत किया जाएगा।
आपको बता दें कि खिलाड़ियों की मौत की जांच के लिए कमेटी का भी गठन कर दिया है, जो कि एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।
चलिए अब आपको ये भी बताते है कि हरियाणा में खेल व्यवस्था के साथ खेल कैसे हो रहा है ?
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के आठ जिलों में खेल अधिकारी ही नहीं है। ऐसे में खेल जगत में खिलाड़ियों और पदकों का गढ़ कहे जाने वाले हरियाणा में खेल सुविधाएं बदहाल है।
एक तरफ जहां सरकार बेहतर खेल नीति और खेल सुविधाओं का दावा कर रही है तो वहीं दूसरी तरफ सच्चाई ये है कि हरियाणा के आठ जिलों रोहतक, भिवानी, दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, गुरुग्राम, पलवल और अंबाला में तो लंबे समय से जिला खेल अधिकारी (डीएसओ) ही नहीं है। ऐसे में यहां खेल व्यवस्था कौन देख रहा है ? ये बड़ा सवाल है।
उधर, इस मुद्दे पर हरियाणा और पंजाब में राजनीतिक बयानबाजियां भी जारी है। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने रोहतक में आकर जहां हरियाणा की खराब खेल व्यवस्था पर अनेक गंभीर सवाल उठाए तो हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने पंजाब के खराब हालात बयां किए।
सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि केजरीवाल और आम आदमी पार्टी एक महीने में पंजाब से नशा खत्म करने का वादा कर सरकार तो बना ली लेकिन हालात कैसे हैं, वे सबके सामने है।
उन्होंने कहा कि नशे की वजह से पंजाब के युवा बर्बाद हो रहे हैं, वहां अपराध भी बढ़ रहा है। सीएम भगवंत मान वहां कुछ करने की बजाय हरियाणा में आकर राजनीति कर रहे है।



