हरियाणा के सरकारी स्कूलों में सफाई बजट के 8.65 करोड़ रुपये जारी, फिर भी स्कूलों तक नहीं पहुंची पूरी राशि
Yuva Haryana: हरियाणा के सरकारी प्राथमिक स्कूलों में साफ-सफाई, स्वच्छ शौचालय और परिसर को व्यवस्थित रखने के लिए जारी बजट के वितरण में देरी का मामला सामने आया है। शिक्षा विभाग ने सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सात महीने पहले 8.65 करोड़ रुपये का बजट जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद कई जिलों के स्कूलों तक पूरी राशि नहीं पहुंच पाई है। कुल आवंटित बजट में से करीब 3.09 करोड़ रुपये ही वितरित किए गए हैं, जबकि बड़ी राशि अब भी संबंधित अधिकारियों के स्तर पर अटकी हुई है।
विभाग की ओर से इस संबंध में चार बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद बजट वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। इससे स्कूलों में सफाई व्यवस्था और जरूरी सेवाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सात महीने पहले जारी हुआ था बजट
सरकारी प्राथमिक स्कूलों में साफ-सुथरा परिसर, स्वच्छ शौचालय और खेलने के लिए साफ मैदान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने बजट जारी किया था। इस राशि का इस्तेमाल स्कूलों में सफाई संबंधी कामकाज और आवश्यक व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए किया जाना था।
कुल आवंटित बजट का केवल 35.73 प्रतिशत हिस्सा ही संबंधित स्कूलों तक पहुंचा है। अब तक वितरित राशि में से करीब 2.75 करोड़ रुपये खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है। इससे स्पष्ट होता है कि बजट जारी होने के बावजूद राशि के वितरण और उपयोग की प्रक्रिया में देरी हुई है।
शिक्षा विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बची हुई राशि जल्द वितरित की जाए और हर महीने बजट खर्च का हिसाब सुनिश्चित किया जाए।
हिसार, गुरुग्राम और नूंह में बड़ी राशि बाकी
- हिसार: 63.04 लाख रुपये के आवंटन में से 26.80 लाख रुपये वितरित हुए हैं। 36.24 लाख रुपये यानी 57.49 प्रतिशत राशि बाकी है।
- नूंह: 65.76 लाख रुपये के बजट में से 29.92 लाख रुपये वितरित हुए हैं। यहां 35.84 लाख रुपये यानी 54.50 प्रतिशत राशि शेष है।
- गुरुग्राम: 37.44 लाख रुपये के आवंटन में से 15.68 लाख रुपये वितरित किए गए हैं। 21.76 लाख रुपये यानी 58.12 प्रतिशत राशि अभी बाकी है।
- कुरुक्षेत्र: 41.44 लाख रुपये के बजट में से 14.88 लाख रुपये वितरित हुए हैं। 26.56 लाख रुपये अब भी शेष हैं।
- पंचकूला: रिपोर्ट के अनुसार, यहां 7.20 लाख रुपये का पूरा बजट वितरित किया जा चुका है।
- कैथल: 1.16 करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन हुआ, जिसमें से 93.88 लाख रुपये वितरित किए गए हैं और 85.24 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि अलग-अलग जिलों में बजट वितरण और खर्च की स्थिति एक जैसी नहीं है। कुछ जिलों में राशि का बड़ा हिस्सा अब भी वितरित किया जाना बाकी है।
बजट मंजूर, लेकिन खर्च की प्रक्रिया में उलझन
सफाई के लिए प्रति स्कूल निर्धारित 8 हजार रुपये का बजट लेने और खर्च करने की प्रक्रिया में भी स्कूलों को परेशानी हो रही है। राशि प्राप्त करने के बाद स्कूलों को सफाई कार्य के लिए बजट का इस्तेमाल करना होता है, लेकिन भुगतान और अन्य औपचारिकताओं में देरी होने से व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इस संबंध में शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शेष राशि का जल्द वितरण सुनिश्चित करने और हर महीने बजट खर्च की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्थायी सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की मांग
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने कहा कि विभाग को आठ हजार रुपये अस्थायी तौर पर जारी करने के बजाय स्कूलों में स्थायी सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति करनी चाहिए। उनके अनुसार, इससे हर महीने बजट की मांग और भुगतान की जटिल प्रक्रिया से बचा जा सकेगा तथा स्कूलों में नियमित सफाई सुनिश्चित होगी।
मौलिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से बजट वितरण की स्थिति पर जवाब मांगा जाएगा। विभाग का उद्देश्य सफाई व्यवस्था दुरुस्त करना और यह सुनिश्चित करना है कि आवंटित राशि समय पर स्कूलों तक पहुंचे।
स्कूलों की सफाई व्यवस्था पर नजर
सरकारी स्कूलों में स्वच्छ परिसर और साफ शौचालय विद्यार्थियों के स्वास्थ्य तथा पढ़ाई के माहौल के लिए जरूरी हैं। ऐसे में सफाई बजट का समय पर वितरण और सही उपयोग महत्वपूर्ण है। अब यह देखना होगा कि शिक्षा विभाग के निर्देशों के बाद लंबित राशि कब तक स्कूलों तक पहुंचती है और सफाई व्यवस्था में कितना सुधार होता है।

