Yuva Haryana: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसके तहत सरकारी कॉलेज के शिक्षकों को ‘करियर एडवांसमेंट स्कीम’ (CAS) के तहत सीनियर स्केल और सिलेक्शन ग्रेड पाने के लिए mandatory 5 साल की ग्रामीण सेवा की शर्त में 1 साल की छूट दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
15 सितंबर का मेमो: हरियाणा सरकार ने 15 सितंबर को एक मेमो जारी कर कॉलेज शिक्षकों के लिए ग्रामीण सेवा की शर्त में 1 साल की छूट देने का प्रावधान किया था।
याचिकाकर्ता की चुनौती: असिस्टेंट प्रोफेसर (इकोनॉमिक्स) बहादुर सिंह ने इस मेमो के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
बिना नियम बदले छूट: याचिका में दलील दी गई कि सरकार ने ‘सेवा नियमों’ में कोई संशोधन किए बिना ही एक कार्यकारी आदेश जारी कर दिया, जो कि संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत बनाए गए नियमों के विपरीत है।
कोर्ट में याचिकाकर्ता के मुख्य तर्क
- 7 साल से ज्यादा ग्रामीण सेवा: याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने खुद ग्रामीण कॉलेज (गवर्नमेंट कॉलेज, भोडिया खेड़ा) में 7 साल और 7 महीने से अधिक समय तक सेवा दी है।
- पुराने फैसलों का हवाला: याचिका में हाईकोर्ट के 24 जनवरी 2014 के फैसले और मानहानि मामले की कार्यवाहियों का जिक्र करते हुए कहा गया कि ग्रामीण सेवा की अनिवार्य शर्त को पहले भी कोर्ट सही ठहरा चुका है।
- कार्यकारी आदेश की सीमा: वकील ने तर्क दिया कि केवल एक प्रशासनिक आदेश के जरिए वैधानिक नियमों को निलंबित या शिथिल नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट का रुख और अगला कदम
न्यायमूर्ति हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार के 15 सितंबर के मेमो पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
अगली सुनवाई: इस मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2027 तय की गई है।
सरकार से जवाब तलब: कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई से कम से कम 7 दिन पहले अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
रोक जारी रहेगी: कोर्ट ने साफ किया है कि अगली सुनवाई की तारीख तक सरकार के छूट वाले आदेश (15 सितंबर के मेमो) पर स्टे लागू रहेगा।

