Yuva Haryana: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्कूलों में एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के बच्चों के साथ होने वाले भेदभाव और प्रताड़ना को रोकने के लिए बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने हरियाणा के विद्यालय शिक्षा विभाग और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएससी) को तीन महीने के भीतर सुरक्षा दिशा-निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने का कड़ा आदेश दिया है।
एलजीबीटीक्यू+ बच्चों की प्रताड़ना पर अदालत सख्त
अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्कूलों में शिकायत निवारण तंत्र के भीतर लैंगिक पहचान और यौन अभिविन्यास के आधार पर होने वाली प्रताड़ना को भी शामिल किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार को एलजीबीटीक्यू+ बच्चों की सुरक्षा और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दिए गए सुझावों पर विचार करने को भी कहा गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा आदेश फरीदाबाद के एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले 16 वर्षीय छात्र की आत्महत्या से जुड़े मामले के बाद आया है। छात्र की मां ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उनके बेटे को छठी कक्षा से ही साथी छात्र कथित तौर पर अपमानित और प्रताड़ित कर रहे थे। याचिका में शारीरिक और यौन उत्पीड़न के साथ-साथ सोशल मीडिया पर परेशान किए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए गए थे। इस प्रताड़ना से तंग आकर छात्र ने 24 फरवरी 2022 को आत्महत्या कर ली थी।
कार्रवाई और निगरानी के लिए निर्देश
प्रभावी व्यवस्था: अदालत ने कहा है कि स्कूलों में शिकायतों के निपटारे की एक प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए।
निगरानी और अनुपालन: सीबीएसई को अपने संबद्ध स्कूलों में नियमों के पालन की निगरानी करने, वार्षिक रिपोर्टों की जांच करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
एनसीईआरटी की भूमिका: एनसीईआरटी से परामर्श करके छह महीने के भीतर संबंधित मुद्दों पर ठोस निर्णय लेने का निर्देश भी दिया गया है।

