Yuva Haryana: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आरक्षण नीति को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आरक्षित वर्ग (जैसे EWS, OBC, SC, ST) का कोई उम्मीदवार सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी के अंतिम चयनित उम्मीदवार से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे केवल उसकी आरक्षित श्रेणी तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उच्च मेरिट हासिल करने पर ऐसा उम्मीदवार जनरल श्रेणी की सीट पर नियुक्ति पाने का पूर्ण हकदार है।
यह फैसला इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी (IGU), मीरपुर (रेवाड़ी) में वर्ष 2019 में निकली लेबोरेटरी अटेंडेंट भर्ती मामले की सुनवाई के दौरान आया।
क्या था पूरा मामला?
दिसंबर 2019 में IGU मीरपुर ने लेबोरेटरी अटेंडेंट के 13 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, जिसमें 6 पद सामान्य और 1 पद EWS श्रेणी के लिए आरक्षित था। याचिकाकर्ता मनजीत कुमार ने EWS श्रेणी के तहत आवेदन किया था और परीक्षा/टेस्ट में 37.91 अंक हासिल किए।
यूनिवर्सिटी द्वारा जारी नतीजों में सामान्य श्रेणी के कुछ ऐसे उम्मीदवारों का चयन कर लिया गया, जिनके अंक मनजीत कुमार से कम थे। जब मनजीत ने इसका विरोध किया, तो यूनिवर्सिटी प्रशासन का तर्क था कि उसने EWS श्रेणी में आवेदन किया था और वह उस श्रेणी में तीसरे स्थान पर था, इसलिए उसे जनरल सीट नहीं दी जा सकती। इसके खिलाफ मनजीत कुमार व अन्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “ओपन कैटेगरी किसी एक वर्ग का कोटा नहीं”
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न ऐतिहासिक फैसलों (जैसे सौरव यादव केस और BSNL बनाम संदीप चौधरी) का हवाला दिया। अदालत ने यूनिवर्सिटी के रुख को असंवैधानिक और मनमाना करार देते हुए रद्द कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया:
“ओपन या जनरल कैटेगरी किसी एक वर्ग के लिए आरक्षित कोटा नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से मेरिट पर आधारित होती है। यदि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार ने आयु या शुल्क में कोई विशेष छूट नहीं ली है और उसके अंक सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से अधिक हैं, तो उसे सामान्य श्रेणी में ही जगह मिलनी चाहिए।
यूनिवर्सिटी को हाईकोर्ट के 4 अहम निर्देश:
पुनः मेरिट का आकलन: विवि प्रशासन को याचिकाकर्ताओं की मेरिट का फिर से आकलन कर जनरल कैटेगरी के तहत नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष पद का सृजन: यदि पदों की कमी पड़ती है, तो सरकार व यूनिवर्सिटी 6 सप्ताह के भीतर विशेष पद सृजित कर उम्मीदवारों को नियुक्ति दें।
पुराने कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित: कोर्ट ने राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि जो उम्मीदवार पहले से चयनित होकर कार्य कर रहे हैं, उन्हें नौकरी से नहीं निकाला जाएगा।
काल्पनिक वरिष्ठता (Notional Seniority): नए नियुक्त होने वाले उम्मीदवारों को उसी तिथि से काल्पनिक वरिष्ठता और लाभ दिए जाएंगे, जब से उनसे कम अंक वाले उम्मीदवारों को नियुक्त किया गया था।

