हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्टों का संकट, 1064 स्वीकृत पदों में 450 से ज्यादा खाली; 5 साल से भर्ती नहीं
Yuva Haryana: हरियाणा के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में फार्मासिस्टों की कमी मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। प्रदेश में फार्मासिस्टों के 1064 स्वीकृत पदों में से 450 से ज्यादा खाली पड़े हैं। पिछले करीब पांच वर्षों से नियमित भर्ती नहीं होने के कारण कई अस्पतालों में दवा वितरण का काम दूसरे स्वास्थ्य कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है। इसका असर न केवल मरीजों को दवाएं मिलने पर पड़ रहा है, बल्कि अस्पतालों की व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है।
कई जिलों में बड़ी संख्या में पद खाली
प्रदेश के कई जिलों में फार्मासिस्टों के पद लंबे समय से खाली हैं। जिलेवार आंकड़ों के अनुसार अंबाला में सबसे ज्यादा 50 पद खाली हैं। इसके बाद करनाल में 46, सिरसा में 44, यमुनानगर में 36 और नारनौल में 35 पद रिक्त हैं।
अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनक है। जींद में 25, रेवाड़ी में 24, गुरुग्राम और झज्जर में 22-22, सोनीपत में 20, कैथल और कुरुक्षेत्र में 17-17, हिसार और पानीपत में 27 और 28 पद खाली बताए गए हैं। वहीं पलवल में 27, भिवानी में 26, फतेहाबाद में 29, नूंह में 16, फरीदाबाद और रोहतक में 12-12 तथा पंचकूला में 12 पद रिक्त हैं।
इन रिक्तियों के चलते अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में काम कर रहे कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी आ रही है।
कुरुक्षेत्र में 20 फार्मासिस्टों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र
कुरुक्षेत्र जिले में स्वास्थ्य केंद्रों पर केवल 20 फार्मासिस्टों के भरोसे मरीजों को दवा देने की व्यवस्था चल रही है। कई बार मरीजों को दवा लेने के लिए इंतजार करना पड़ता है। कुछ केंद्रों पर फार्मासिस्ट नहीं होने के कारण मरीजों को दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों या अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि वहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही लोगों के लिए इलाज और दवा का मुख्य सहारा होते हैं। यदि इन केंद्रों पर फार्मासिस्ट उपलब्ध नहीं हैं, तो मरीजों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूर जाना पड़ सकता है।
दूसरे कर्मचारियों से कराया जा रहा दवा वितरण का काम
फार्मासिस्टों की कमी के चलते कई जगह नर्सिंग स्टाफ, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों से दवा वितरण का काम लिया जा रहा है। हालांकि दवाओं का सही वितरण, उनका भंडारण, रिकॉर्ड रखना और मरीजों को दवा के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी देना फार्मासिस्ट की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।
दवा वितरण में प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की भूमिका अहम होती है। वह मरीज को दवा की खुराक, सेवन का समय और जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी देता है। ऐसे में पद खाली रहने से मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है।
भर्ती प्रक्रिया में देरी की वजह क्या है?
हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में फार्मेसी अधिकारियों की कमी का मुद्दा पहले भी उठाया गया था। उस समय उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 1085 स्वीकृत पदों में से 385 खाली बताए गए थे। रिपोर्ट में अधिकारियों ने बताया था कि नियमित नियुक्तियों के लिए सेवा नियमों में संशोधन की प्रक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
इसके बाद मार्च 2026 में हरियाणा कैबिनेट ने फार्मेसी अधिकारियों की भर्ती से जुड़े नियमों में बदलाव को मंजूरी दी। नए प्रावधानों के तहत सीधी भर्ती का हिस्सा 75 प्रतिशत से बढ़ाकर 95 प्रतिशत किया गया और पदोन्नति का हिस्सा 25 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया। साथ ही अस्पताल आधारित फार्मेसी सेवाओं में छह महीने की अनिवार्य ट्रेनिंग की शर्त हटाने का फैसला लिया गया। सरकार का उद्देश्य योग्य उम्मीदवारों का दायरा बढ़ाकर भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाना था।
हालांकि अक्टूबर की रिपोर्ट में सामने आए खाली पद बताते हैं कि अस्पतालों में फार्मासिस्टों की उपलब्धता का संकट अभी बना हुआ है।
मरीजों को राहत देने के लिए भर्ती जरूरी
सरकारी अस्पतालों में फार्मासिस्ट केवल दवा बांटने का काम नहीं करते, बल्कि दवाओं के स्टॉक, उनकी उपलब्धता और सुरक्षित रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। ऐसे में लंबे समय तक पद खाली रहने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ना स्वाभाविक है।
अब जरूरत है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाए और अस्पतालों में खाली पदों को भरे। इससे मौजूदा कर्मचारियों पर काम का दबाव कम होगा और मरीजों को समय पर दवाएं तथा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

