पलवल के 14 गांवों में 30 साल से अधिक उम्र के 122 कैंसर मरीज मिले, 31 गांवों में चल रही स्क्रीनिंग
Yuva Haryana: हरियाणा के पलवल जिले में कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की जांच में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। जिले के 14 गांवों में 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग के दौरान कैंसर के 122 सक्रिय मरीज मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने पहले चरण में 31 गांवों को जांच अभियान में शामिल किया है। इनमें से 14 गांवों में घर-घर जाकर स्क्रीनिंग पूरी हो चुकी है, जबकि बाकी गांवों में जांच की प्रक्रिया जारी है।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में पूरे पलवल जिले में अब तक 365 कैंसर मरीज दर्ज थे। ऐसे में केवल 14 गांवों में 122 सक्रिय मरीजों का मिलना स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि सभी चिह्नित गांवों में जांच पूरी होने के बाद जिले में कैंसर और अन्य बीमारियों की वास्तविक स्थिति का बेहतर आकलन किया जा सकेगा।
इन 14 गांवों में मिले कैंसर के मरीज
स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने जिन 14 गांवों में स्क्रीनिंग पूरी की है, उनमें अलावलपुर, अल्लिका, औरंगाबाद, सौंध, बंचारी, बेढ़ा पट्टी, दीघोट, बघोला, भिड़ूकी, बडोली, चांट, धतीर, हसनपुर, जनौली और सराय खटेला शामिल हैं।
अभियान के तहत 30 साल से अधिक उम्र के लोगों की जांच की जा रही है। इसका उद्देश्य कैंसर के साथ-साथ मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और दूसरी गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान करना है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आए मामलों की आगे आवश्यक चिकित्सकीय जांच और पुष्टि की जाएगी।
दूषित पानी और औद्योगिक कचरे को लेकर चिंता
पलवल के ग्रामीण क्षेत्रों में नहरों और ड्रेनों के पानी की गुणवत्ता का मुद्दा लंबे समय से उठता रहा है। स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि दिल्ली, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पलवल की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट गुड़गांव कैनाल, आगरा कैनाल और गौंछी ड्रेन में पहुंच रहा है।
कुछ क्षेत्रों में भूजल खारा होने के कारण किसान सिंचाई के लिए नहरों और अन्य जल स्रोतों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में दूषित पानी से खेतों की सिंचाई और उसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों को लेकर ग्रामीणों में चिंता है।
पानी की गुणवत्ता को लेकर सामने आए आंकड़े भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ स्थानों पर पानी का बीओडी (Biochemical Oxygen Demand) स्तर करीब 50 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंचने की बात कही गई है। बीओडी पानी में मौजूद जैविक प्रदूषण और उसे तोड़ने के लिए सूक्ष्म जीवों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा का संकेत देता है। इसका अधिक होना पानी की गुणवत्ता खराब होने की ओर इशारा करता है।
हालांकि, कैंसर के इन मामलों का दूषित पानी से सीधा संबंध अभी वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुआ है। इसके लिए पानी, मिट्टी, फसलों और मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी की विस्तृत जांच जरूरी होगी।
हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीज भी मिले
स्क्रीनिंग अभियान में कैंसर के अलावा दूसरी बीमारियों के संदिग्ध मरीज भी सामने आए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर के 560 लोगों की जांच की गई, जिनमें 90 लोगों में बीमारी के संकेत मिले। वहीं, मधुमेह यानी शुगर के 55 संदिग्ध मरीजों की पहचान हुई।
इसके अलावा ओरल कैंसर का एक और ब्रेस्ट कैंसर के पांच संदिग्ध मामले भी सामने आए हैं। इन लोगों की आगे जांच कर बीमारी की पुष्टि की जाएगी।
जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी वास्तविक तस्वीर
पलवल के सिविल सर्जन डॉ. सतिंदर वशिष्ठ के अनुसार, जिले में कैंसर समेत अन्य गंभीर बीमारियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है। पहले चरण में 31 गांवों को शामिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर दूसरे गांवों में भी घर-घर जाकर स्क्रीनिंग कराई जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से उन लोगों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जिन्हें बीमारी का पता नहीं है या जो समय पर इलाज नहीं करा पा रहे हैं। अब सभी की नजरें बाकी गांवों में होने वाली जांच और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट पर हैं।

