Yuva Haryana: हरियाणा के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वायु प्रदूषण को लेकर गुरुग्राम सबसे खराब स्थिति में पहुंच गया है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार, गुरुग्राम की सीमा के भीतर 19 हॉटस्पॉट की पहचान की गई है।
सर्वेक्षण के मुख्य बिंदु:
हरियाणा के 13 एनसीआर जिलों में कुल 76 वायु प्रदूषण हॉटस्पॉट (या खतरे के जोन) की पहचान की गई है, क्योंकि सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु गुणवत्ता खराब होने लगी है।
गुरुग्राम में हॉटस्पॉट की संख्या सबसे अधिक है, इसके बाद झज्जर में 15 और रोहतक में 13 हॉटस्पॉट हैं।
प्रदूषण के प्रमुख कारण:
रिपोर्ट में शहर की जहरीली हवा के लिए मुख्य रूप से तीन कारकों को जिम्मेदार ठहराया गया है:
- टूटी सड़कों और बिना पक्की सड़कों से उड़ने वाली धूल।
- व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला धुआं।
- खुला निर्माण मलबा, अवैध डंपिंग और बांदवाड़ी लैंडफिल साइट पर कचरा।
प्रमुख हॉटस्पॉट:
पहचाने गए हॉटस्पॉट में आईएमटी मानेसर में आईएमटी चौक और सेक्टर-1 मुख्य सड़क, बह्रामपुर औद्योगिक क्षेत्र, दादी सती चौक, सेक्टर-86 और सेक्टर-88 सड़क परियोजनाएं, एनएच-48 पर क्लोवर लीफ, बसई-द्वारका एक्सप्रेसवे इंटरसेक्शन, सेक्टर-114 में चिनटेल्स चौक, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड, इफ्को चौक, सेक्टर-65, राघवेन्द्र मार्ग, बांदवाड़ी लैंडफिल, उद्योग विहार फेज-5 और सेक्टर 44 व 57 शामिल हैं।
प्रशासन की कार्ययोजना और कदम:
- बढ़ते प्रदूषण पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बोर्ड ने गुरुग्राम नगर निगम (MCG), गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) और अन्य संबंधित एजेंसियों को तीन महीने का समय दिया है।
- बोर्ड और जिला प्रशासन ने एक त्रि-स्तरीय (थ्री-स्टेज) योजना तैयार की है।
- तत्काल उठाए जाने वाले कदमों में मुख्य सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव, नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना और भीड़भाड़ वाले बिंदुओं पर यातायात पुलिस की तैनाती शामिल है।
- अल्पकालिक उपायों के तहत, सड़कों की मैकेनिकल स्वीपर्स से सफाई की जाएगी, गड्ढे भरे जाएंगे और सड़कों के किनारों से अवैध मलबा व कचरा हटाया जाएगा।
- दीर्घकालिक योजनाओं में कच्ची सड़कों पर पक्कीकरण (पेविंग), जंक्शनों का पुनरुत्थान और सड़कों के दोनों ओर ग्रीन बेल्ट का विकास शामिल है।
- शहर के चार वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों पर औसतन ‘विकास सदन’ को सबसे प्रदूषित क्षेत्र दिखाया गया है। एमसीजी कमिश्नर प्रदीप दहिया ने कहा कि अधिकारियों को शहर में प्रदूषण नियंत्रण के काम की निगरानी के लिए जोन-वार जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि सड़कों को धूलमुक्त बनाने का काम लगातार जारी है।

