Yuva Haryana: हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) द्वारा इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के विरोध में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) ने राज्य सरकार पर बड़ा हमला बोला है। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक एवं पूर्व वित्त मंत्री प्रो. संपत सिंह ने गुरुवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि सरकार तुरंत विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108 का उपयोग कर जनहित में नीतिगत निर्देश जारी करे और इस फैसले को रद्द करे।
केंद्रीय मंत्री और सरकार पर गंभीर आरोप
प्रो. संपत सिंह ने आरोप लगाया कि समानांतर बिजली वितरण का यह लाइसेंस केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के इशारे पर उनकी करीबी कंपनी को दिया गया है। उन्होंने कहा कि मात्र 1 करोड़ रुपये की पूंजी वाली एक नई कंपनी को 4,700 करोड़ रुपये की परियोजना का लाइसेंस सौंपा गया है। उन्होंने ऊर्जा मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के उस बयान को बेतुका और जनता को गुमराह करने वाला बताया, जिसमें सरकार द्वारा इस फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की बात कही गई है।
बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल को इनेलो का समर्थन
हरियाणा के बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं द्वारा लाइसेंस रद्द करने की मांग को लेकर की जा रही हड़ताल का इनेलो ने पूर्ण समर्थन किया है। प्रो. संपत सिंह ने कहा कि निजी कंपनी के आने से सार्वजनिक वितरण निगमों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा और लाभ कमाने वाले कॉरपोरेट उपभोक्ता निजी हाथों में चले जाएंगे। इसका सीधा नुकसान ग्रामीण इलाकों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
कांग्रेस और बीजेपी की मिलीभगत पर निशाना
इनेलो नेता ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत कांग्रेस के किसी भी नेता ने इस समानांतर वितरण लाइसेंस का विरोध नहीं किया है। इससे साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस और भाजपा की आपस में मिलीभगत है।
ग्रामीण और किसानों पर पड़ेगा अतिरिक्त वित्तीय बोझ
प्रो. संपत सिंह के अनुसार, गुरुग्राम शहर से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) को कुल राजस्व का 42.98% (₹9,493 करोड़) प्राप्त होता है। निजी कंपनी गुरुग्राम जैसे भारी राजस्व वाले क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी, जबकि नूंह जैसे ग्रामीण क्षेत्र के लिए महज 6.5% निवेश प्रस्तावित है। इससे निगम को सालाना करीब ₹3,000 करोड़ का क्रॉस-सब्सिडी घाटा और भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ेगा, जिसकी भरपाई का बोझ आम जनता और किसानों पर डाला जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि इनेलो इस फैसले के खिलाफ अदालतों से लेकर सड़कों तक पूरी कानूनी, तकनीकी और राजनीतिक ताकत के साथ लड़ाई लड़ेगी।

