Yuva Haryana: गुरुग्राम में घर और कमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदारों को बड़ी राहत देते हुए जिला प्रशासन ने डिफॉल्टर बिल्डरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की है। हरियाणा रियल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा), गुरुग्राम के आदेशों और रिफंड सर्टिफिकेट के तहत करीब 446 करोड़ रुपये की बकाया राशि की वसूली के लिए प्रशासन ने 71 बिल्डरों के बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से कई रिकवरी सर्टिफिकेट 4 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं।
खाते फ्रीज होने के बाद अब संपत्तियां होंगी कुर्क
जिला प्रशासन ने केवल बैंक खातों तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। राजस्व अधिकारियों ने बिल्डरों की चल और अचल संपत्तियों को अटैच (कुर्क) करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके लिए हरियाणा में लागू पंजाब लैंड रेवेन्यू एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।
संबंधित कंपनियों को औपचारिक डिमांड नोटिस जारी कर बकाया राशि तत्काल जमा करने को कहा गया है। प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि यदि बैंक खातों और संपत्तियों से बकाया रकम की वसूली नहीं हो पाती है, तो डिफॉल्टर प्रोमोटरों के खिलाफ सिविल अरेस्ट और हिरासत के कड़े प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाएगा।
सालों से रिफंड के इंतजार में खरीदार
प्रशासन के इस कदम से उन खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है जो लंबे समय से रिफंड का इंतजार कर रहे हैं।
पीड़ित खरीदार का मामला: गुरुग्राम के सेक्टर-84 स्थित रहेजा ट्रिनिटी प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले रोहित सिंह और उनकी पत्नी ने 2017 में 50 लाख रुपये से अधिक लगाए थे। प्रोजेक्ट की हैंडओवर की समय-सीमा 2024 में पूरी हो गई, लेकिन साइट पर काम आगे नहीं बढ़ा।
हरेरा का आदेश: अगस्त में हरेरा ने रहेजा डेवलपर्स को रोहित की रकम 10.8 प्रतिशत ब्याज के साथ 90 दिनों में लौटाने का आदेश दिया था। हालांकि, अभी तक उन्हें न भुगतान मिला है और न ही बिल्डर की ओर से कोई स्पष्ट सूचना मिली है।
हरेरा गुरुग्राम के चेयरमैन अरुण कुमार ने प्रशासन की कार्रवाई का स्वागत करते हुए इसे आदेशों के अनुपालन के लिए जरूरी कदम बताया है।
इन बड़े बिल्डरों पर है सबसे ज्यादा बकाया
हरेरा के आदेशों की वसूली अब जिला प्रशासन भू-राजस्व के बकाए के तौर पर करेगा। गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर उत्तम सिंह ने बताया कि अथॉरिटी बिल्डर पर जुर्माना लगा देती है, लेकिन जब तक रकम होमबायर्स तक नहीं पहुंचती, तब तक प्रक्रिया का पूरा उद्देश्य हासिल नहीं होता। डिप्टी कमिश्नर खुद हर सप्ताह रिकवरी अभियान की समीक्षा करेंगे, जबकि एसडीएम और तहसीलदारों को वसूली की कार्रवाई आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रमुख डिफॉल्टर बिल्डर्स और उनकी देनदारी:
- अंसल हाउसिंग और अंसल कंस्ट्रक्शन: करीब 91 करोड़ रुपये
- रहेजा डेवलपर्स: 90 करोड़ रुपये
- वाटिका लिमिटेड: 80 करोड़ रुपये
- पार्श्वनाथ डेवलपर्स: 74 करोड़ रुपये
- रामप्रस्थ प्रोमोटर्स: 57 करोड़ रुपये
- आईरियो (Ireo): 24 करोड़ रुपये
- आई.एल.डी. मिलेनियम: 59 करोड़ रुपये

