Yuva Haryana: हरियाणा में पेड़ों की अवैध कटाई पर रोक लगाने और पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के लिए वन विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब बिना अनुमति पेड़ काटने पर लकड़ी की कीमत के साथ-साथ पौधरोपण का खर्च भी संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा। इसके अलावा, काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले तीन पौधे लगाने और उनकी पांच साल तक देखभाल करने की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
इन निर्देशों का उद्देश्य प्रदेश में हरियाली बढ़ाना, वन संपदा की रक्षा करना और अवैध रूप से पेड़ काटने वालों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। नए प्रावधानों के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हर पेड़ के बदले लगाने होंगे तीन पौधे
हरियाणा वन विभाग के नए निर्देशों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति पेड़ काटता है, तो उसे काटे गए प्रत्येक पेड़ के बदले तीन पौधे लगाने होंगे। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनकी नियमित देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संबंधित व्यक्ति को निभानी होगी।
पौधों को सुरक्षित रखने और उनके विकास को सुनिश्चित करने के लिए पांच साल तक देखभाल करना अनिवार्य होगा। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पौधरोपण केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि लगाए गए पौधे जीवित रहें और भविष्य में पेड़ों का रूप ले सकें।
वन विभाग का मानना है कि इस कदम से पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी और प्रदेश में हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों को गति मिलेगी।
लकड़ी की कीमत के साथ पौधरोपण का खर्च भी वसूला जाएगा
नए निर्देशों में आर्थिक जवाबदेही पर भी जोर दिया गया है। बिना अनुमति पेड़ काटने के मामले में संबंधित व्यक्ति से लकड़ी का मूल्य और पौधरोपण पर आने वाला खर्च वसूला जाएगा।
इसका अर्थ है कि नियम तोड़ने वाले व्यक्ति को केवल पेड़ काटने के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई ही नहीं करनी होगी, बल्कि नए पौधे लगाने और उनकी देखभाल से जुड़ा खर्च भी उठाना पड़ सकता है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित राशि जमा नहीं करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ भू-राजस्व की बकाया राशि की तरह वसूली की कार्रवाई की जा सकती है। इससे विभाग को आर्थिक दंड और वसूली की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण मुहावजे की राशि नहीं देने पर होगी वसूली
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने अधिकारियों को निर्देशों को सख्ती से लागू करने को कहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण मुहावजे की राशि जमा नहीं करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
इसके बाद संबंधित राशि की वसूली भू-राजस्व के बकाये की तरह की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी से बच न सकें।
विभाग ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि पेड़ काटने से संबंधित मामलों में नियमों के अनुरूप कार्रवाई हो और पौधरोपण तथा देखभाल की शर्तों का पालन कराया जाए।
डीएफओ को निर्देश लागू करने की जिम्मेदारी
हरियाणा वन विभाग ने प्रदेश के सभी जिला वन अधिकारियों (डीएफओ) को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा है। अधिकारियों को पेड़ों की कटाई से संबंधित मामलों में निर्धारित प्रक्रिया अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है।
वन विभाग की यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां विकास कार्यों, निर्माण गतिविधियों या अन्य कारणों से पेड़ों की कटाई होती है। नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पेड़ों को काटने की अनुमति देने या अवैध कटाई के मामलों में पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई की व्यवस्था बनी रहे।
पेड़ों की कटाई के लिए अनुमति जरूरी
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि पेड़ काटने से पहले संबंधित नियमों के अनुसार अनुमति लेना आवश्यक है। बिना अनुमति पेड़ काटना कानूनी कार्रवाई और आर्थिक वसूली का कारण बन सकता है।
पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, वायु गुणवत्ता सुधारने, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पेड़ों की कटाई के बाद नए पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
हर पेड़ के बदले तीन पौधे लगाने और पांच साल तक उनकी देखभाल की जिम्मेदारी तय करने से हरियाणा में हरित क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अलग-अलग मामलों में लागू नियमों, अनुमति प्रक्रिया और वसूली की विस्तृत शर्तों के लिए वन विभाग के आधिकारिक आदेशों को देखना जरूरी है।

