Yuva Haryana: हरियाणा के फतेहाबाद जिले में राइस शैलर मालिकों और सरकार के बीच बकाया चावल का मामला लगातार गहराता जा रहा है। पिछले साल की धान मिलिंग का बकाया चावल जमा न कराने पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा एक लाख सात हजार मीट्रिक टन से अधिक चावल लेने से इनकार करने के बाद, सरकार ने संबंधित राइस शैलर मालिकों को सीधे धान की कीमत जमा करवाने का फरमान जारी कर दिया है। इसके तहत जिले के शैलर मालिकों से करीब 50 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है, जिसकी अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तय की गई है।
क्या है पूरा मामला और विवाद का कारण?
जिले में पिछले साल कुल 266 राइस शैलरों ने धान की मिलिंग की थी। इनमें से 95 मिलों के पास लगभग 1,07,772 मीट्रिक टन (MT) चावल बकाया रह गया था। जब FCI ने चावल लेने से मना कर दिया, तो सरकार ने चावल की डिलीवरी लेने के बजाय मिल मालिकों से धान की मूल कीमत वसूलने का फैसला किया।
सबसे बड़ी समस्या और विरोध का कारण सरकारी वसूली दर और वर्तमान बाजार भाव के बीच का बड़ा अंतर है:
- सरकार द्वारा तय वसूली दर: ₹2,816 प्रति क्विंटल
- इस वर्ष का सरकारी खरीद भाव: ₹2,461 प्रति क्विंटल
- वर्तमान बाजार दर (मंडी में): ₹2,400 से ₹2,500 प्रति क्विंटल
ऐसे में अगर मिल मालिकों को सरकार द्वारा निर्धारित ₹2,816 प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान करना पड़ता है, तो उन्हें बाजार भाव से बहुत अधिक रकम चुकानी होगी। इससे व्यापारियों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
4 मिल मालिकों ने जमा कराए पैसे
इस भारी विरोध और आर्थिक दबाव के बीच जिले के 4 राइस शैलर मालिकों ने धान के पैसे सरकार के पास जमा करवा दिए हैं। हालांकि, बाकी 95 राइस शैलरों के सामने इस अंतर की भरपाई करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
“सरकार पहले से संकट में घिरे मिल मालिकों को और मार रही है” — सुरेश जिंदल
जिला राइस शैलर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश जिंदल ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है।
सुरेश जिंदल ने कहा:
“राइस शैलर मालिक पहले से ही कई तरह की आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में उन पर करोड़ों रुपये की अतिरिक्त देनदारी डालना बिल्कुल भी उचित नहीं है। मिलों में तैयार चावल रखा हुआ है। सरकार को बिना किसी देरी के अपने चावल की डिलीवरी तुरंत लेनी चाहिए। 1,07,000 मीट्रिक टन से अधिक चावल का बकाया और 45 से 50 करोड़ रुपये की संभावित वसूली का यह मामला कारोबारियों के लिए गंभीर संकट बन गया है।”

