Yuva Haryana: हरियाणा में 10,757 अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की मांग पर एक बार फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने 2014 की नियमितीकरण नीति के तहत चार अतिथि पीजीटी (PGT) शिक्षकों के दावे खारिज कर दिए हैं। विभाग का तर्क है कि लंबे समय तक सेवा देने और निर्धारित योग्यता रखने मात्र से नियमितीकरण का अधिकार नहीं मिल जाता।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद राहत नहीं और विभाग का तर्क
विभाग के अनुसार, अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 2005 में स्कूलों में शिक्षकों की कमी और कार्यभार को कम करने के लिए पीरियड भुगतान की व्यवस्था के तहत की गई थी। इन नियुक्तियों में नियमित भर्ती की तरह केंद्रीकृत चयन प्रक्रिया और आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया था।
इससे पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 25 मई को नियमितीकरण के दावों पर 18 जून 2014 की नीति के तहत विचार करने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार की अपील पर 6 अगस्त को खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानूनी सिद्धांतों के आधार पर ही फैसला लिया जा सकता है। इसके तहत शिक्षा विभाग ने चार शिक्षकों के दावे खारिज किए हैं, जिनका मामला अलग याचिका से जुड़ा है। वहीं, सभी अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के दावों की जांच के लिए विभाग ने एक कमेटी भी गठित की है।
अतिथि अध्यापक संघ की कड़ी आपत्ति और आगामी आंदोलन
राजकीय अनुबंध अध्यापक संघ के महासचिव भूपेंद्र सिंह ने विभाग के इस आदेश को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि विभाग का यह आदेश अन्य अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण के दावों के खिलाफ भी इस्तेमाल किया जा सकता है। संघ के पदाधिकारियों को आशंका है कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
संघ के विरोध प्रदर्शन के तहत आगामी 1 नवंबर को गुरुग्राम, हिसार और अंबाला में रैलियां निकाली जाएंगी तथा कुरुक्षेत्र के लघु सचिवालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। जिन चार शिक्षकों के दावे खारिज हुए हैं, उनमें गुरुग्राम के बादशाहपुर स्कूल की आर्ति गौर, करनाल के कटलेहड़ी स्कूल के भूपेंद्र पाल सिंह और नीतू तथा कुरुक्षेत्र के बानी स्कूल के निर्मल सिंह शामिल हैं।
दूसरी ओर: 20 साल से पढ़ा रहे शिक्षकों को नियमितीकरण की जगी उम्मीद
एक अन्य मामले में, भिवानी और झज्जर जिलों के सरकारी स्कूलों में कार्यरत स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) और प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) जो वर्ष 2005 से 2007 के बीच चयन प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए थे और दो दशकों से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें राहत की उम्मीद है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर भिवानी और झज्जर के इन शिक्षकों की याचिका पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। शिक्षकों ने दलील दी थी कि अतिथि शिक्षक सेवा अधिनियम, 2019 के तहत उन्हें 58 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने की अनुमति है, लेकिन नियमितीकरण पर अब तक उचित निर्णय नहीं लिया गया। हाईकोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को सभी पक्षों पर विचार कर तीन महीने में आदेश पारित करने को कहा है।

