Yuva Haryana: हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। रतिया विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक लक्ष्मण नापा द्वारा की गई सिफारिश पर विभाग द्वारा मंजूर किए गए 2.18 करोड़ रुपये के फंड को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रोक दिया है। इस कार्रवाई के बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट न मिलने से नाराज होकर लक्ष्मण नापा ने भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। हालांकि, बाद में वह दोबारा मई महीने में भाजपा में लौट आए थे। हाल ही में उन्होंने पूर्व विधायक की हैसियत से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को रतिया हलके के 15 विकास कार्यों की सूची भेजकर उन्हें कराने की सिफारिश की थी।
नापा के इस पत्र पर कार्रवाई करते हुए 29 सितंबर को पंचायती राज विभाग ने 13 कार्यों पर मुहर लगाते हुए 2.18 करोड़ रुपये का फंड मंजूर कर दिया था। फंड मंजूर होने के बाद लक्ष्मण नापा ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए इसकी जानकारी जनता के साथ साझा की थी।
सीएम कार्यालय ने दिए आदेश, फाइल वापस मांगी
जैसे ही इसकी जानकारी सामने आई, मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए हरियाणा ग्रामीण विकास योजना के तहत जारी स्वीकृति के आदेशों को रद्द करने के निर्देश दे दिए और निदेशालय से फाइल वापस मांग ली है। मुख्यमंत्री ने इस स्वीकृति को स्थगित करने की इच्छा जताई है और इस संबंध में जिप सीईओ को पत्र भेज दिया गया है।
राजनीतिक समीकरण और विरोध की चर्चा
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस रतिया सीट से जुड़े सियासी समीकरण और राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोपों के चलते कांग्रेस के जर्नल सिंह पहले से ही निलंबित चल रहे हैं। वहीं, वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और स्थानीय स्तर पर चल रहे विरोध के कारण लक्ष्मण नापा की सिफारिश पर मिली इस ग्रांट को रोकना सरकार का एक बड़ा राजनीतिक कदम माना जा रहा है।

