Yuva Haryana: हरियाणा के विभिन्न जिलों की मंडियों में परमल धान की आवक तेजी से बढ़ रही है, लेकिन न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सरकारी खरीद सुस्त पड़ी हुई है। फसल में अधिक नमी, सक्रिय राइस मिलरों की कमी और पिछले सीजन का स्टॉक बकाया होने के कारण किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर किसान अपनी फसल निजी व्यापारियों को कम दामों पर (डिस्ट्रेस सेल) बेचने के लिए मजबूर हैं।
आवक के मुकाबले आधी ही बोली
‘ई-खरीद’ पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 22 जिलों के 249 खरीद केंद्रों पर अब तक 8.92 लाख मीट्रिक टन धान पहुंचा है। हालांकि, कुल आवक का केवल 45% (लगभग 4.02 लाख मीट्रिक टन) ही तीन सरकारी एजेंसियों—भारतीय खाद्य निगम (FCI), हैफेड (HAFED) और हरियाणा राज्य भंडारण निगम (HSWC)—द्वारा बोली लगाकर खरीदा गया है।
लगातार हो रही देरी और धीमी उठान से परेशान किसान राज्य के ‘राइस बाउल’ कहे जाने वाले क्षेत्रों—करनाल, अंबाला और कुरुक्षेत्र—में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
नमी के नियम और MSP पर कट
केंद्र सरकार द्वारा सामान्य धान के लिए ₹2,441 प्रति क्विंटल और ग्रेड-A धान के लिए ₹2,461 प्रति क्विंटल का MSP तय किया गया है। सरकारी नियमों के तहत धान में अधिकतम 17% नमी की अनुमति है। जिन किसानों की फसल में नमी इससे अधिक है, उन्हें मंडियों में सुखाने का इंतजार करना पड़ रहा है या फिर मजबूरी में डिस्काउंट रेट पर निजी खरीदारों को बेचना पड़ रहा है।
व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद करनाल के उपायुक्त (DC) आनंद कुमार शर्मा ने निसिंग मंडी का दौरा कर खरीद व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान किसानों ने धीमी खरीद, मिलरों की गैरमौजूदगी और MSP में अवैध कटौती किए जाने की शिकायतें दर्ज कराईं।

