हरियाणा की मंडियों में पंजाब-UP की धान की बोरियां पहुंचीं, स्थानीय खरीद पर उठे सवाल
Yuva Haryana: हरियाणा की मंडियों में स्थानीय किसानों की धान खरीद को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन की ओर से स्थानीय धान की खरीद के दावों के बीच मंडियों में पंजाब और उत्तर प्रदेश की बोरियां पहुंचने से विवाद खड़ा हो गया है। किसानों ने आरोप लगाया है कि दूसरे राज्यों से धान लाकर हरियाणा की मंडियों में उतारा जा रहा है, जिससे स्थानीय किसानों की उपज की खरीद और भुगतान व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
कैथल, करनाल, हिसार और आसपास के क्षेत्रों की मंडियों में दूसरे राज्यों की बोरियां दिखाई देने के बाद किसानों ने जांच की मांग उठाई है। किसान संगठनों का कहना है कि यदि बाहरी राज्यों से लाई गई धान की खरीद स्थानीय किसानों के नाम पर होती है, तो इससे सरकारी खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है।
मंडियों में दूसरे राज्यों की बोरियां मिलने से विवाद
मंडियों में पंजाब और उत्तर प्रदेश की बोरियां दिखाई देने से स्थानीय खरीद व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि प्रशासन स्थानीय धान की खरीद के दावे कर रहा है, लेकिन मंडियों में दूसरे राज्यों की बोरियों की मौजूदगी की जांच होनी चाहिए।
किसान यूनियन ने मांग की है कि धान की आवक, किसानों के पंजीकरण, खरीद रिकॉर्ड और भुगतान का मिलान कराया जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि मंडियों में पहुंच रही फसल कहां से आई है और उसकी खरीद किन किसानों के नाम पर दर्ज की जा रही है।
किसान यूनियन ने उठाई जांच की मांग
भारतीय किसान यूनियन के निदेशक मंदीप सिंह राठौड़ ने मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दूसरे राज्यों से धान लाकर हरियाणा की मंडियों में बेचा जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
किसान संगठनों ने सवाल उठाया कि मंडियों में दूसरे राज्यों की बोरियां कैसे पहुंचीं और क्या खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से धान की उत्पत्ति, आवक रिकॉर्ड और खरीद दस्तावेजों की जांच करने की मांग की है।
बारिश के बाद मंडियों में धान रखने की जगह की कमी
पिछले सप्ताह हुई बारिश के बाद मंडियों में धान रखने की जगह की कमी भी सामने आई है। कुछ मंडियों में धान का उठान धीमा होने के कारण किसानों को अपनी उपज रखने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यमुनानगर की मंडियों में धान की आवक और उठान के बीच अंतर होने से खरीद प्रक्रिया पर दबाव बना हुआ है। किसानों का कहना है कि जब तक मंडियों से खरीदे गए धान का समय पर उठान नहीं होगा, तब तक नई फसल रखने की व्यवस्था प्रभावित होती रहेगी।
कई जिलों में धान खरीद और उठान जारी
यमुनानगर जिले की 13 मंडियों में लगभग 2.09 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हुई थी। इसमें करीब 1.72 लाख मीट्रिक टन की खरीद और 1.14 लाख मीट्रिक टन का उठान होने की जानकारी दी गई है।
करनाल, कुरुक्षेत्र और अन्य जिलों में भी धान की खरीद तथा उठान की प्रक्रिया जारी है। हालांकि, उठान में देरी और भुगतान को लेकर किसानों की चिंताएं बनी हुई हैं।
यमुनानगर में धान के उठान और भुगतान के आंकड़ों के बीच स्थानीय किसानों की मांग है कि प्रशासन खरीद प्रक्रिया को तेज करे और मंडियों में पर्याप्त जगह उपलब्ध कराए।
प्रशासन से पारदर्शी खरीद व्यवस्था की मांग
किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद व्यवस्था का लाभ वास्तविक स्थानीय किसानों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए मंडियों में आने वाली फसल का रिकॉर्ड रखने, किसानों के दस्तावेजों की जांच करने और भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की जरूरत है।
किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। अब इस मामले में प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर नजर रहेगी।

