हरियाणा की प्राचीन सभ्यता को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर, राखीगढ़ी में करीब 188 करोड़ रुपये की लागत से विकसित हो रहा संग्रहालय एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर
Yuva Haryana: हरियाणा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सात दिवसीय राखीगढ़ी महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार राखीगढ़ी को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए पुरातात्विक स्थल के संरक्षण, शोध और पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
राखीगढ़ी की मिट्टी में हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता के प्रमाण मौजूद हैं। यह स्थल प्राचीन मानव जीवन, शिल्पकला, रहन-सहन और विकसित सामाजिक व्यवस्था की जानकारी देता है। सरकार का उद्देश्य इस विरासत को सुरक्षित रखने के साथ देश-विदेश के लोगों तक पहुंचाना है, ताकि हरियाणा की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिल सके।
करीब 188 करोड़ रुपये से विकसित होगा संग्रहालय
मुख्यमंत्री ने बताया कि राखीगढ़ी में संग्रहालय एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसे करीब 188 करोड़ रुपये की लागत से विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। इस केंद्र के माध्यम से पर्यटक और शोधकर्ता राखीगढ़ी के इतिहास, प्राचीन सभ्यता और यहां हुई पुरातात्विक खोजों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।
सरकार का प्रयास है कि राखीगढ़ी को केवल ऐतिहासिक स्थल तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे शिक्षा, शोध और पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। इससे विद्यार्थियों, इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल माध्यमों से दुनिया तक पहुंचेगी युवा विरासत
महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री ने युवा पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी की ऐतिहासिक जानकारी को डिजिटल माध्यमों के जरिए व्यापक स्तर पर पहुंचाया जाना चाहिए। इससे नई पीढ़ी अपने अतीत को समझ सकेगी और प्राचीन सभ्यता के महत्व से परिचित होगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, मिट्टी से बने बर्तन, मनकों का काम, आभूषण और अन्य पुरातात्विक वस्तुएं उस समय के लोगों की रचनात्मकता तथा कौशल को दर्शाती हैं। इन वस्तुओं के माध्यम से प्राचीन समाज के जीवन और उसकी विकसित परंपराओं को समझा जा सकता है।
उन्होंने सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य प्रमुख पुरातात्विक स्थलों के बीच बेहतर संपर्क और पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ावा देना है।
उद्यमियों के स्टॉल का किया निरीक्षण
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने महोत्सव स्थल पर विभिन्न सरकारी विभागों और उद्यमियों की ओर से लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण भी किया। उन्होंने स्टॉल संचालकों से बातचीत कर उनके उत्पादों, गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी ली।
स्टॉल संचालकों ने बताया कि राखीगढ़ी महोत्सव स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को प्रदर्शित करने का अच्छा मंच है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अपने उत्पाद लोगों तक पहुंचाने तथा बिक्री बढ़ाने के अवसर मिलते हैं।
हरियाणा की विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा ने भी राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयासों पर जोर दिया।
प्राचीन विरासत से पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा
राखीगढ़ी में मिले पुरातात्विक साक्ष्य प्राचीन सभ्यता के इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां की खोजों में प्राचीन जीवनशैली, जल निकासी, स्वच्छता, खेती-बाड़ी, शिल्पकला और कारीगरी से जुड़े पहलुओं की जानकारी मिलती है।
विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के लिए यह स्थल अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र है। यदि इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास सफल होते हैं, तो राखीगढ़ी की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हो सकती है। इससे पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
सात दिवसीय राखीगढ़ी महोत्सव-2026 के जरिए सरकार ने हरियाणा की प्राचीन विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया है। अब संग्रहालय के विकास, शोध और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार के साथ राखीगढ़ी को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों पर नजर रहेगी।

