Yuva Haryana : हरियाणा में चाहे सरकार द्वारा बाढ़ और जलभराव पीड़ितों को मुआवजा देकर मरहम लगा दिया हो, लेकिन आज भी प्रदेश के किसान मानसून सीजन की भारी बरसात की परेशानी का सामना करने को मजबूर है। इतना ही नहीं अब तो उन्हें लगातार अपनी तीसरी फसल का नुकसान झेलने का डर सताने लग गया है।
दरअसल, एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार हरियाणा में सात महीने पहले मानसून सीजन 2025 के दौरान हुई भारी बरसात का पानी आज भी रोहतक जिले के गांव सैमाण के हजारों बीघा जमीन में दो-तीन फुट खड़ा है।
यहां पहले भारी बरसात के चलते खरीफ फसल धान को भारी नुकसान पहुंचा। फिर, प्रशासन द्वारा समय पर पानी निकासी नहीं होने के कारण किसान रबी सीजन की फसल नहीं उगा पाए। अब किसानों का यह भी कहना है कि उन्हें अप्रैल माह में शुरू होने वाली खरीफ फसल की भी बुआई नहीं होने का डर सता रहा है।
बार-बार विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन को गुहार लगाकर थक चुके किसान अब खुद चंदा इकट्ठा करके जलभराव की समस्या से लड़ रहे है।
साथ ही किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि धान की खराब फसल का मुआवजा उन्हें नाममात्र ही मिला। वहीं गेहूं की बिजाई नहीं होने के चलते गिरदावरी तक भी नहीं हो सकी, जबकि उन्हें दूसरी फसल का भी पूरा नुकसान हुआ है।
किसानों का यह भी कहना है कि प्रशासन द्वारा जलभराव क्षेत्र चौखला से लाइन पास की गई थी, लेकिन बाद में उसे रद्द कर दिया गया। उन्होंने फिर से प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगाई है ताकि वे आगे खरीफ सीजन की खेती करके अपने आर्थिक हालात सुधार सके।
उधर, जिला प्रशासन का कहना है कि एसडीओ और जेई को मौके पर भेजकर मुआयना करवाया गया है। एक बार पानी निकालने के लिए किसानों को खेतों के किनारे काटने को कहा गया है, ताकि पानी झील में आ सके। पानी निकलने के बाद ही स्थायी पाइप दबाई जाएगी।



