हरियाणा की भाजपा सरकार पर साधा निशाना, मतदाता सूची से नाम काटने और युवाओं पर कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल; बुजुर्गों की पेंशन व पंचायतों के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया
Yuva Haryana: जननायक जनता पार्टी (जजपा) के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने रविवार को नारनौल क्षेत्र के नांगल चौधरी हलके के आठ गांवों में आयोजित नुक्कड़ जनसभाओं को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने मतदाता सूची, युवाओं, किसानों, बुजुर्गों की पेंशन, मनरेगा और पंचायतों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकार पर निशाना साधा।
कार्यक्रमों की अध्यक्षता जिला प्रधान राजकुमार रावत ने की, जबकि जजपा प्रदेश कार्यालय के सचिव रविंद्र सांगवान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। जनसभाओं में ग्रामीणों से बातचीत करते हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा कि सरकार को लोगों की समस्याएं सुनकर उनका स्थायी समाधान करना चाहिए।
मतदाता सूची से नाम काटने पर उठाए सवाल
दुष्यंत चौटाला ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि हरियाणा में करीब 34 लाख मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटाया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
उन्होंने मतदाता सूची को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि पात्र नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता रखने और नाम हटाए जाने के मामलों की उचित जांच करने की जरूरत पर जोर दिया।
युवाओं के प्रदर्शन और कार्रवाई पर सवाल
जजपा नेता ने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की मांगों को लेकर आंदोलन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए करीब 25 हजार अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई, जबकि प्रदर्शन में लगभग सात हजार युवा शामिल थे।
चौटाला ने कहा कि युवाओं की समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुना जाए और विरोध प्रदर्शन के दौरान पैदा होने वाली परिस्थितियों को संवाद के जरिए सुलझाया जाए।
बुजुर्गों और विधवा महिलाओं की पेंशन का मुद्दा
पूर्व उपमुख्यमंत्री ने बुजुर्गों और विधवा महिलाओं की पेंशन से जुड़े मामलों पर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पेंशन काटे जाने और सरपंचों के अधिकार सीमित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बुजुर्गों और जरूरतमंद महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता समय पर मिलनी चाहिए। सरकार को ऐसे मामलों की समीक्षा कर पात्र लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए, ताकि किसी जरूरतमंद को अनावश्यक परेशानी न हो।
किसानों को फसल बेचने में परेशानी का आरोप
दुष्यंत चौटाला ने किसानों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसल बेचने के दौरान किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि किसानों की उपज की खरीद व्यवस्था सुचारू हो और उन्हें फसल बेचने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए। सरकार को खरीद, भुगतान और मंडियों से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान करना चाहिए, ताकि किसानों को समय पर उनकी फसल का उचित मूल्य मिल सके।
मनरेगा और पंचायतों के अधिकारों पर भी चर्चा
जनसभाओं में मनरेगा के तहत गांवों में विकास कार्य करवाने में आ रही कथित परेशानियों का मुद्दा भी उठाया गया। चौटाला ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और विकास कार्यों की व्यवस्था प्रभावी होनी चाहिए। मनरेगा जैसी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में उपयोगी काम करवाना है।
उन्होंने पंचायतों को ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण इकाई बताते हुए कहा कि उनके अधिकार कमजोर होने से गांवों के विकास पर असर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से बुजुर्गों, महिलाओं, मजदूरों और पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
आठ गांवों में ग्रामीणों से किया संवाद
दुष्यंत चौटाला ने नांगल चौधरी हलके के विभिन्न गांवों में ग्रामीणों से संवाद किया और पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की। कार्यक्रमों में हलका प्रधान प्रमोद तावर, प्रभारी विनोद भील, राव ओमप्रकाश इंजीनियर, मास्टर हरचंद तोबड़ा, राजकुमार धौलेड़ा और जिला प्रवक्ता विजय छिलरो सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इन जनसभाओं के जरिए जजपा ने ग्रामीण क्षेत्रों में मतदाता सूची, रोजगार, किसान हितों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि, मतदाता सूची से हटाए गए नामों और सुरक्षा बलों की तैनाती से जुड़े आंकड़े दुष्यंत चौटाला के दावों पर आधारित हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि संबंधित आधिकारिक आंकड़ों से की जानी चाहिए।

