हरियाणा में निजी बिजली कंपनी को झटका, गुरुग्राम-नूंह में लाइसेंस पर लगी रोक
Yuva Haryana: हरियाणा में बिजली वितरण के क्षेत्र में निजी कंपनी की एंट्री को लेकर विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) ने गुरुग्राम और नूंह में बिजली सप्लाई के लिए Eleven Power Private Limited को दिए गए लाइसेंस पर आगे की कार्रवाई रोक दी है। आयोग ने कंपनी की सुनवाई का अनुरोध भी खारिज कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि राज्य में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को लागू नहीं किया जाना चाहिए।
यह मामला उस समय चर्चा में आया, जब HERC ने 19 अक्टूबर को निजी कंपनी को 25 साल के लिए बिजली वितरण लाइसेंस देने का आदेश जारी किया था। इससे गुरुग्राम और नूंह में सरकारी बिजली वितरण कंपनी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) के साथ एक निजी कंपनी को भी बिजली सप्लाई करने का रास्ता खुल सकता था।
सरकार ने बिजली आयोग को दिए थे निर्देश
हरियाणा सरकार ने 26 अक्टूबर को बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत HERC को लिखित निर्देश जारी किए। सरकार ने आयोग से कहा कि प्रदेश में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस बनाया, लागू या संचालित न किया जाए।
सरकार ने अपने फैसले के पीछे उपभोक्ताओं के हित, सरकारी बिजली कंपनियों की वित्तीय स्थिति और जनहित का हवाला दिया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी से जारी इन निर्देशों में कहा गया कि निजी कंपनी को लाइसेंस देने से मौजूदा बिजली वितरण व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी कहा कि सरकार बिजली क्षेत्र और उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देगी। सरकार के हस्तक्षेप के बाद बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त हुई थी।
कंपनी ने मांगा था सुनवाई का मौका
Eleven Power Private Limited ने 23 अक्टूबर को HERC को आवेदन देकर कहा था कि लाइसेंस से जुड़े किसी भी मामले में आगे की कार्रवाई करने से पहले उसे सूचना दी जाए और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
हालांकि, आयोग ने 28 अक्टूबर को जारी आदेश में कहा कि राज्य सरकार के निर्देश लिखित रूप में हैं और पूरे हरियाणा पर लागू होते हैं। ऐसे में निर्देशों को प्रभावी करने के लिए आयोग के सामने अलग से किसी विवाद पर सुनवाई करने की जरूरत नहीं है। इसी आधार पर कंपनी की मांग खारिज कर दी गई और लाइसेंस के मामले में आगे की कार्रवाई रोक दी गई।
कंपनी की ओर से कहा गया है कि वह आयोग और राज्य सरकार के साथ बातचीत जारी रखेगी तथा कानून के तहत उपलब्ध विकल्पों पर विचार करेगी।
बिजली कर्मचारियों ने किया था विरोध
निजी कंपनी को लाइसेंस देने के फैसले के बाद हरियाणा के बिजली विभाग के कर्मचारियों और इंजीनियरों ने विरोध शुरू कर दिया था। कर्मचारियों को आशंका थी कि निजी कंपनी की एंट्री से सरकारी बिजली कंपनियों और कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
विरोध के दौरान बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा। इसके बाद सरकार ने मामले में हस्तक्षेप करने और बिजली अधिनियम की धारा 108 के तहत निर्देश जारी करने का भरोसा दिया। सरकार के इस कदम के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी।
सरकारी बिजली कंपनियों ने भी उठाए थे सवाल
राज्य की बिजली वितरण कंपनियों ने निजी कंपनी की वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारी और सभी उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभाने की क्षमता पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि यदि निजी कंपनी मुख्य रूप से अधिक राजस्व देने वाले औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को अपने साथ जोड़ती है, तो सरकारी बिजली कंपनियों की आय प्रभावित हो सकती है।
बिजली कंपनियों को आशंका थी कि इससे पहले से मौजूद बिजली खरीद समझौतों, नेटवर्क के रखरखाव और अन्य खर्चों का बोझ सरकारी कंपनियों पर बढ़ सकता है। वहीं, निजी कंपनी को लाइसेंस देने के पक्ष में यह तर्क दिया गया था कि प्रतिस्पर्धा से उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकती हैं और नए कनेक्शन देने में होने वाली देरी कम हो सकती है।
आगे क्या होगा ?
फिलहाल राज्य सरकार के निर्देश लागू रहने तक HERC इस मामले में आगे नहीं बढ़ेगा। निजी कंपनी के पास आयोग के आदेश को चुनौती देने सहित कानूनी विकल्प मौजूद हैं। इसलिए यह विवाद आगे अदालत या संबंधित अपीलीय मंच तक पहुंच सकता है।
इस पूरे मामले का असर गुरुग्राम और नूंह के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। हालांकि, अभी निजी कंपनी की ओर से नई बिजली आपूर्ति शुरू होने का रास्ता रुका हुआ है और मौजूदा व्यवस्था में DHBVN ही इन क्षेत्रों की सरकारी बिजली वितरण कंपनी बनी हुई है।

