हरियाणा में अवैध होर्डिंग से करोड़ों का नुकसान, 1142 करोड़ रुपये के राजस्व का अंतर; सड़क सुरक्षा पर भी खतरा
Yuva Haryana: हरियाणा में विज्ञापन और प्रचार सामग्री लगाने के नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आया है। राज्य के शहरी निकाय क्षेत्रों में बिना अनुमति लगाए जा रहे होर्डिंग, फ्लैक्स, पोस्टर और यूनिपोल से न केवल सड़क सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी नुकसान पहुंचने की बात कही जा रही है। जुलाई 2022 से अक्टूबर 2026 के बीच विज्ञापनों से संभावित आय और वास्तव में प्राप्त राजस्व के बीच बड़ा अंतर दर्ज किया गया है।
इस अवधि में निकाय क्षेत्रों को विज्ञापनों से 1,656.97 करोड़ रुपये का राजस्व मिलना चाहिए था, जबकि करीब 514 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए। इस तरह दोनों आंकड़ों के बीच 1,142.97 करोड़ रुपये का अंतर है। हालांकि, इस पूरी राशि को सीधे राजस्व चोरी या वसूली योग्य बकाया मानना उचित नहीं होगा। इसके लिए विभागवार बकाया, संभावित आय और वास्तविक वसूली का विस्तृत हिसाब जरूरी है।
गुरुग्राम से रोहतक तक अवैध विज्ञापनों की समस्या
गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, रोहतक, हिसार, करनाल और धारूहेड़ा जैसे क्षेत्रों में अवैध विज्ञापन संरचनाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई जगहों पर बिना अनुमति यूनिपोल खड़े करने, भवनों की दीवारों पर बड़े विज्ञापन लगाने और सार्वजनिक स्थानों पर फ्लैक्स-पोस्टर चिपकाने के मामले सामने आए हैं।
गुरुग्राम में नगर निगम ने अक्टूबर 2024 में अवैध होर्डिंग के खिलाफ कार्रवाई के दौरान सैकड़ों संरचनाएं हटाने की जानकारी दी थी। निगम के अनुसार, उस समय विज्ञापन नियमों के उल्लंघन पर जुर्माना भी वसूला गया था। इससे स्पष्ट होता है कि कार्रवाई के बावजूद अवैध विज्ञापन प्रशासन के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं।
सिरसा में भी अक्टूबर 2026 में बिना अनुमति होर्डिंग लगाए जाने और भवनों की दीवारों को विज्ञापन के लिए किराये पर देने की समस्या सामने आई थी। स्थानीय निकाय ने ऐसे मामलों में नोटिस जारी कर कार्रवाई करने की तैयारी बताई थी।
नियमों के अनुसार अनुमति लेना जरूरी
हरियाणा में शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों में विज्ञापन लगाने के लिए हरियाणा म्युनिसिपल एडवरटाइजमेंट बायलॉज-2022 बनाए गए हैं। इनके तहत निर्धारित सार्वजनिक स्थलों पर विज्ञापन लगाने के लिए अनुमति और शुल्क की व्यवस्था है। नगर निकायों की विज्ञापन साइटों का आवंटन नीलामी के माध्यम से भी किया जाता है।
नियमों का उद्देश्य विज्ञापन व्यवस्था को नियंत्रित करना, सरकारी राजस्व बढ़ाना और सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था रोकना है। इसके बावजूद बिना मंजूरी विज्ञापन लगाने से वैध तरीके से शुल्क जमा करने वाली एजेंसियों और सरकारी निकायों की आय प्रभावित हो सकती है।
हाईवे के आसपास विज्ञापन लगाने के मामले में भी अलग-अलग एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र का सवाल उठता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की जमीन पर बिना अनुमति प्रचार सामग्री लगाने पर कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन हाईवे की सीमा समाप्त होने के बाद आसपास के क्षेत्र में निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित भूमि और स्थानीय निकाय के अधिकार क्षेत्र पर निर्भर करती है।
सड़क सुरक्षा के लिए भी खतरा
सड़क किनारे बड़े होर्डिंग और यूनिपोल चालकों का ध्यान भटका सकते हैं। चौराहों, मोड़ों और ट्रैफिक सिग्नल के आसपास लगाए गए विज्ञापन दृश्यता को प्रभावित कर सकते हैं। तेज रोशनी वाली एलईडी स्क्रीन भी रात के समय वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बन सकती हैं।
विज्ञापन लगाने के लिए निर्धारित दूरी, ऊंचाई और स्थान संबंधी नियमों का पालन इसलिए जरूरी है, ताकि यातायात संकेत, सड़क पर दृश्यता और पैदल यात्रियों की आवाजाही प्रभावित न हो। अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों और व्यस्त सड़कों के आसपास नियमों के उल्लंघन की शिकायतों पर विशेष निगरानी की जरूरत है।
अवैध होर्डिंग लगाने वालों पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
हरियाणा में सार्वजनिक और निजी संपत्ति को विज्ञापन के लिए अवैध रूप से इस्तेमाल करने के मामलों में हरियाणा प्रिवेंशन ऑफ डिफेसमेंट ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1989 और संबंधित नगर निकाय कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। स्थानीय निकाय अवैध विज्ञापन हटाने, जुर्माना लगाने और नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने के कदम उठा सकते हैं।
रोहतक में अक्टूबर 2026 में नगर निगम ने अवैध होर्डिंग लगाने वाले 150 से अधिक लोगों पर 40 लाख रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाने की जानकारी दी थी। निगम ने यह भी कहा था कि निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं करने पर आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
निगरानी और विभागीय तालमेल बढ़ाने की जरूरत
शहरी स्थानीय निकायों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अवैध विज्ञापन हटाने के बाद कई स्थानों पर दोबारा लगा दिए जाते हैं। इससे कार्रवाई का स्थायी असर नहीं हो पाता। जरूरी है कि प्रशासन विज्ञापन स्थलों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करे, अनुमति प्राप्त यूनिपोल की नियमित जांच करे और उल्लंघन करने वालों की पहचान कर कार्रवाई करे।
साथ ही, नगर निकायों, लोक निर्माण विभाग और NHAI के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि सड़क और भूमि की सीमा को लेकर जिम्मेदारी स्पष्ट रहे। विज्ञापन से होने वाली संभावित आय और वास्तविक वसूली के अंतर का विभागवार ऑडिट भी जरूरी है। इससे पता चल सकेगा कि राजस्व कहां अटका है और किन क्षेत्रों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है।

