Yuva Haryana: हरियाणा सरकार ने राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा और उनकी शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए ‘हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम’ (Haryana State Commission for Minorities Act) लागू कर दिया है। विधानसभा से पारित इस विधेयक को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद सरकार ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है।
इस नए अधिनियम के तहत हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां प्रदान की गई हैं।
आयोग का ढांचा और कार्यकाल
अध्यक्ष व सदस्य: आयोग में एक चेयरमैन (अध्यक्ष), एक वाइस चेयरमैन (उपाध्यक्ष) और 5 सदस्य शामिल होंगे।
योग्यता: आयोग के सभी सदस्य अल्पसंख्यक समुदाय से ही होंगे।
कार्यकाल: आयोग का कार्यकाल 3 वर्ष का होगा।
प्रशासनिक अधिकारी: एचसीएस (HCS) स्तर के अधिकारी को आयोग के सचिव पद पर नियुक्त किया जाएगा।
आयोग के पास होंगी ये प्रमुख शक्तियां
- समन व जांच: आयोग किसी भी व्यक्ति को गवाही देने के लिए समन भेज सकता है और हलफनामे (शपथ पत्र) पर जांच कर सकता है।
- दस्तावेज तलब करना: आयोग किसी भी सरकारी विभाग या दफ्तर से रिकॉर्ड एवं दस्तावेज मंगवा सकता है।
- सीधी कार्रवाई के निर्देश: अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन से जुड़ी शिकायतों पर जांच कर आयोग संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दे सकता है।
सांप्रदायिक सद्भाव के लिए बनेगा ‘रिसर्च सेल‘
प्रदेश में आपसी भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए आयोग सरकार को सिफारिशें देगा। इसके अलावा अल्पसंख्यक कल्याणकारी मुद्दों के गहन अध्ययन के लिए अलग से एक ‘रिसर्च सेल’ का गठन किया जाएगा। आयोग हर साल अपना बजट और वार्षिक कार्य रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा, जिसे विधानसभा पटल पर रखा जाएगा।
सियासी समीकरण और सिख समुदाय
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आयोग का पहला अध्यक्ष सिख समुदाय से बनाया जा सकता है।
आबादी का गणित: हरियाणा में अल्पसंख्यकों में सिख आबादी सबसे अधिक है। अम्बाला, कुरुक्षेत्र, सिरसा, फतेहाबाद, करनाल, पानीपत, यमुनानगर और कैथल जिलों में सिख मतदाताओं की अच्छी संख्या है।
मुस्लिम प्रभाव क्षेत्र: प्रदेश में मुस्लिम आबादी का मुख्य प्रभाव नूंह, यमुनानगर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल जिलों में है।
कानूनी विशेषज्ञ की राय:
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के वकील जगबीर मलिक के अनुसार, आयोग को सिविल कोर्ट की शक्तियां केवल उसके कार्य से जुड़े मामलों में ही प्राप्त होंगी। आदेश न मानने की स्थिति में क्या कार्रवाई होगी, इसके लिए सरकार को अलग से नियम तय करने होंगे।

