जनगणना 2027 के लिए शिक्षकों का ब्योरा मांगने वाले 1 और 7 सितंबर के पत्रों पर रोक; अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2027 को
Yuva Haryana: हरियाणा में निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी पर तैनात करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देते हुए संबंधित सरकारी पत्रों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। अदालत ने हरियाणा सरकार से इस मामले में जवाब भी मांगा है। यह मामला जनगणना 2027 के लिए निजी स्कूलों के शिक्षकों की सेवाएं लेने से जुड़ा है।
हाईकोर्ट में यह याचिका हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस की ओर से दायर की गई थी। संगठन ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना कार्य के लिए अनिवार्य रूप से तैनात करने की मांग और उससे जुड़े सरकारी निर्देशों को चुनौती दी। न्यायमूर्ति एचएस बराड़ की पीठ ने हरियाणा सरकार के 1 और 7 सितंबर को जारी संबंधित पत्रों पर रोक लगाते हुए राज्य से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2027 को होगी।
क्या है पूरा मामला ?
याचिका के अनुसार, जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत अधिकारियों ने सरकारी और निजी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का विवरण मांगा था। इसका उद्देश्य जनगणना के दौरान कर्मचारियों को गणनाकार (Enumerator) या पर्यवेक्षक (Supervisor) के रूप में तैनात करना था।
हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल्स कॉन्फ्रेंस ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को इस तरह की ड्यूटी पर लगाने पर आपत्ति जताई। संगठन का कहना है कि शिक्षकों की प्राथमिक जिम्मेदारी विद्यार्थियों को पढ़ाना है। उन्हें पढ़ाई से असंबंधित सरकारी काम में अनिवार्य रूप से लगाने के लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार होना चाहिए।
याचिकाकर्ता ने अदालत से संबंधित पत्रों को कानून के विपरीत बताते हुए उन पर रोक लगाने की मांग की थी।
जनगणना अधिनियम की धारा 4A का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 4A का हवाला दिया गया। संगठन का तर्क है कि इस धारा में जनगणना कार्य के लिए स्थानीय प्राधिकरणों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
याचिका में कहा गया कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल और उनके कर्मचारी स्थानीय प्राधिकरण की श्रेणी में नहीं आते। ऐसे में प्रशासनिक पत्र जारी करके निजी स्कूलों के शिक्षकों को जनगणना ड्यूटी के लिए बुलाने का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता।
संगठन ने यह भी दलील दी कि सरकारी निर्देशों के माध्यम से कानून में दिए गए अधिकारों का दायरा बढ़ाकर निजी स्कूलों के कर्मचारियों को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता।
स्कूलों की स्वायत्तता प्रभावित होने की दलील
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि निजी स्कूलों के शिक्षकों को अनिवार्य रूप से गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से संस्थानों के प्रशासन और प्रबंधन की स्वतंत्रता प्रभावित होती है। संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19(1)(g) का भी हवाला दिया।
याचिका के मुताबिक, शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाने से स्कूलों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ये याचिकाकर्ता की ओर से पेश किए गए तर्क हैं; मामले में अंतिम कानूनी निर्णय अभी होना बाकी है।
सरकार से जवाब मांगा, अगली सुनवाई अप्रैल में
हाईकोर्ट ने मामले में हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है और संबंधित पत्रों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2027 को निर्धारित की गई है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत की अंतरिम रोक संबंधित सरकारी पत्रों और निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के संदर्भ में है। इसे हरियाणा के सभी सरकारी स्कूलों के शिक्षकों या जनगणना से जुड़ी हर प्रकार की ड्यूटी पर सामान्य प्रतिबंध नहीं माना जाना चाहिए।
अब मामले में राज्य सरकार का जवाब और अदालत की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अंतिम फैसला आने तक याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर निर्णय होना बाकी है।

