रोहतक के कबूलपुर गांव में सुबह 6 बजे शुरू हुआ विवाद, ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों को भी गांव से जाने से रोका
Yuva Haryana: हरियाणा के रोहतक जिले के कबूलपुर गांव में एक प्रदर्शनकारी को हिरासत में लेने पहुंची पुलिस टीम और ग्रामीणों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। शनिवार सुबह करीब 6 बजे शुरू हुआ यह घटनाक्रम कई घंटे तक चला। पुलिस टीम एक व्यक्ति को हिरासत में लेने गांव पहुंची थी, लेकिन ग्रामीणों ने इसका विरोध करते हुए पुलिसकर्मियों को भी गांव से जाने से रोक दिया। मामले में पुलिस और ग्रामीणों के बीच बातचीत तथा घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
पुलिस टीम दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए जिला परिषद के एक सदस्य को हिरासत में लेने पहुंची थी। संबंधित व्यक्ति की पहचान जय देव डागर के रूप में बताई गई है, जो जीला परिषद के सदस्य हैं। वह दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बना रहे थे।
सुबह 6 बजे गांव पहुंची पुलिस टीम
पुलिस टीम सुबह करीब 6 बजे शिवाजी कॉलोनी पुलिस थाने के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) शिवकरण हुड्डा के नेतृत्व में कबूलपुर गांव पहुंची। टीम में रोहतक के डीएसपी कार्यालय से जुड़े अधिकारी भी शामिल थे। पुलिस का उद्देश्य जय देव डागर को हिरासत में लेना था, ताकि वह दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने के लिए यात्रा न कर सकें।
बताया गया है कि पुलिस ने संबंधित व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए निषेधाज्ञा और अन्य कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया। हालांकि, ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और अधिकारियों से लिखित में कारण बताने की मांग की।
ग्रामीणों ने पुलिस को भी जाने से रोका
पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए गांव के लोग एकत्रित हो गए। ग्रामीणों ने पुलिस टीम से कहा कि जब तक हिरासत में लेने की कार्रवाई का लिखित कारण नहीं दिया जाता, तब तक वे अधिकारियों को गांव से जाने नहीं देंगे। इस दौरान पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के बीच बातचीत होती रही।
जय देव डागर ने बताया कि पुलिस टीम ने उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण स्थिति बदल गई। इसके बाद ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारियों को भी गांव से बाहर जाने से रोक दिया। इस घटनाक्रम के चलते गांव में कई घंटे तक तनाव बना रहा।
फोन कॉल के बाद भी नहीं निकला तुरंत समाधान
डागरके अनुसार, उन्होंने पुलिस टीम के गांव पहुंचने के बाद कई फोन कॉल किए। इस बीच मामले को लेकर बातचीत जारी रही, लेकिन तत्काल कोई समाधान नहीं निकल सका। पुलिस टीम को गांव में ही रुकना पड़ा।
घटनास्थल के वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आने की बात रिपोर्ट में कही गई है। इन वीडियो में ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के बीच बातचीत और विरोध की स्थिति दिखाई देने का उल्लेख है। हालांकि, किसी भी वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जानकारी और सभी पक्षों के बयान देखना जरूरी है।
दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से जुड़ा मामला
डागर ने दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने की योजना बनाई थी। पुलिस का कहना था कि संबंधित कार्रवाई रोहतक जिला प्रशासन की ओर से जारी निषेधाज्ञा से जुड़ी थी। वहीं, दग्गर ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए और इसे अपने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने की कोशिश बताया।
डागर ने यह भी कहा कि वह किसी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने और अपनी बात रखने के अधिकार का समर्थन करते हैं।
पुलिस की जिम्मेदारी पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद पुलिस कार्रवाई, निषेधाज्ञा के इस्तेमाल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन में भाग लेने के अधिकार को लेकर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट में रोहतक के एसएचओ राकेश कुमार का भी उल्लेख है, जिन्होंने मामले की जानकारी लेने के लिए दग्गर से संपर्क किया था।
फिलहाल, इस घटनाक्रम को समझने के लिए पुलिस और ग्रामीणों के पक्ष को साथ रखकर देखना जरूरी है। किसी भी हिरासत या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की वैधता संबंधित आदेशों, कानूनी प्रावधानों और आधिकारिक तथ्यों पर निर्भर करेगी।

