फाइनल में जापान के यूरी नाकाजातो से 0-4 से हारे नितेश; एशियन गेम्स में ग्रीको-रोमन कुश्ती के फाइनल में पहुंचने वाले लंबे अंतराल के बाद भारतीय पहलवान बने
Yuva Haryana :हरियाणा के पहलवान नितेश सिवाच ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की 97 किलोग्राम ग्रीको-रोमन कुश्ती में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल मुकाबले में नितेश को जापान के यूरी नाकाजातो के खिलाफ 0-4 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनका फाइनल तक पहुंचना भारतीय ग्रीको-रोमन कुश्ती के लिए एक बड़ी उपलब्धि रहा।
नितेश ने प्रतियोगिता की शुरुआत शानदार अंदाज में की। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में तुर्कमेनिस्तान के अमानबर्दी अगामम्मेदोव को 7-1 से हराया। इसके बाद सेमीफाइनल में मंगोलिया के गनखुयाग गनबाआतार को 9-0 से मात देकर फाइनल में जगह बनाई।
फाइनल में जापान के नाकाजातो ने शुरुआत से दबाव बनाए रखा और पहले पीरियड के अंत तक 2-0 की बढ़त हासिल कर ली। नितेश ने वापसी की कोशिश की, लेकिन जापानी पहलवान की मजबूत डिफेंस के सामने अंक नहीं बना सके। नाकाजातो ने मुकाबला 4-0 से अपने नाम किया।
64 साल बाद ग्रीको-रोमन में ऐतिहासिक उपलब्धि
नितेश की सिल्वर जीत इसलिए भी खास है क्योंकि भारत को एशियन गेम्स की ग्रीको-रोमन कुश्ती में लंबे समय बाद फाइनल में जगह मिली। 1962 के बाद नितेश इस स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाले भारतीय पहलवान बने। उनकी उपलब्धि ने भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
दूध बेचने से एशियन गेम्स के पोडियम तक का सफर
नितेश सिवाच की सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी है। हरियाणा के जागसी गांव से आने वाले नितेश ने घुटने की सर्जरी के बाद करीब दो साल तक अपने पिता के साथ दूध बेचने में मदद की। रिपोर्टों के अनुसार, वह सुबह जल्दी घर से निकलते और दिनभर परिवार के दूध के कारोबार में काम करने के बाद कुश्ती में लौटे।
अब 23 साल की उम्र में एशियन गेम्स का सिल्वर मेडल जीतकर नितेश ने अपने संघर्ष को बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि में बदल दिया है।

