Yuva Haryana: हरियाणा में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भारी कमी के चलते प्रशासनिक कामकाज पर गहरा दबाव बढ़ गया है. स्थिति यह है कि प्रदेश में 226 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 179 अधिकारी ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं, और लगभग 47 पद खाली चल रहे हैं. इतना ही नहीं, वरिष्ठता सूची के शीर्ष 20 अधिकारियों में से आधे यानी 10 अधिकारी केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर तैनात हैं. इसके अतिरिक्त, बैंक घोटाले से जुड़े मामले में कुछ के नाम आने के कारण भी वरिष्ठ स्तर पर जिम्मेदारियां संभालने के लिए उपलब्ध अधिकारियों की संख्या प्रभावित हुई है.
आने वाले तीन महीनों में कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की सेवानिवृत्ति भी होने वाली है. अगले महीने वरिष्ठ आईएएस सुधीर राजपाल, उसके अगले महीने मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी और फिर सुमिता मिश्रा सेवानिवृत्त हो जाएंगे. मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव का पद भी पिछले 26 दिनों से खाली चल रहा है.
कई विभागों का अतिरिक्त बोझ:
अधिकारियों की इस कमी के कारण कई अधिकारियों के पास दो से अधिक विभागों का प्रभार है, जबकि कुछ अधिकारी चार से पांच विभागों की जिम्मेदारी अकेले संभाल रहे हैं. एक ही अधिकारी पर कई विभागों का बोझ होने से न केवल प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने की आशंका है, बल्कि अधिकारियों की कार्यक्षमता और विभागों की निगरानी पर भी विपरीत असर पड़ रहा है.
केंद्र को भेजे गए ये नाम:
इन सभी आपात परिस्थितियों के मद्देनजर राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर चार आईएएस अधिकारियों को वापस भेजने का अनुरोध किया है:
वी. उमाशंकर (1993 बैच): वर्तमान में केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय में सचिव हैं और पूर्व सीएम मनोहर लाल के प्रधान सचिव भी रह चुके हैं. इन्हें मुख्य सचिव पद पर नियुक्त किए जाने की संभावना जताई जा रही है.
राकेश गुप्ता (1997 बैच): वर्तमान में राष्ट्रपति सचिवालय में अतिरिक्त सचिव हैं तथा मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव रह चुके हैं. इन्हें प्रधान सचिव पद पर नियुक्त किए जाने की चर्चा है.
नितिन कुमार यादव (2000 बैच): वर्तमान में केंद्रीय वाणिज्य विभाग में अतिरिक्त सचिव के रूप में कार्यरत हैं.
विकास गुप्ता (2001 बैच): वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय संगठन के आयुक्त पद पर हैं.
अब यह पूरी तरह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि वह इनमें से किन अधिकारियों को हरियाणा वापस भेजती है.

