Yuva Haryana: हरियाणा के गांवों को शहरों जैसी आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘महाग्राम योजना’ की गति एक बार फिर धीमी पड़ गई है। राज्य के सात गांवों में विकास कार्यों को पूरा करने की निर्धारित समयसीमा निकल चुकी है, लेकिन धरातल पर काम अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है।
इन गांवों की समयसीमा हुई खत्म और बाकी है काम
अधिकारियों और रिकॉर्ड के अनुसार, जिन सात गांवों में समयसीमा बीतने के बाद भी काम अधूरे हैं, उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित गांव शामिल हैं:
- कैथल जिला: भागल और ढांड गांव।
- सिरसा जिला: चौटाला गांव।
- हिसार जिला: पटवार, गंगवा और सिसवाल गांव।
इन सात गांवों में कुल 308.49 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकास कार्य होने थे। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक अब तक इनमें से करीब 199.73 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं। यानी अनुमानित लागत के मुकाबले लगभग 108.76 करोड़ रुपये की राशि खर्च होना अभी बाकी है। इन गांवों में काम की प्रगति 65% से 98% के बीच दर्ज की गई है।
प्रमुख गांवों में लागत और खर्च का अंतर
कैथल का भागल गांव: इसकी समयसीमा 31 मार्च 2026 तय थी। यहाँ 23.49 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के मुकाबले 14.60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। काम 98% पूरा बताया गया है, लेकिन 8.89 करोड़ रुपये का अंतर (कम खर्च) दर्ज है।
सिरसा का चौटाला गांव: यहाँ 72.14 करोड़ रुपये की लागत से काम होना था, जिसमें से 55.35 करोड़ रुपये खर्च हुए और काम 85% पूरा है। इसकी समयसीमा मई 2026 थी।
हिसार का गंगवा गांव: यहाँ 41.18 करोड़ रुपये की लागत में से 24.12 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। काम 70% पूरा है और 17.06 करोड़ रुपये का खर्च बाकी है (समयसीमा 30 जून 2026)।
हिसार का सिसवाल गांव: यहाँ 48.11 करोड़ रुपये की लागत में से 34.46 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। काम 80% पूरा है और करीब 13.65 करोड़ रुपये का खर्च बाकी है।
कैथल का ढांड गांव: यहाँ 61.42 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के मुकाबले 31.20 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यहाँ 65% काम पूरा है और करीब 30.23 करोड़ रुपये का अंतर है। सबसे ज्यादा 30.23 करोड़ रुपये का अंतर कैथल के ढांड गांव में ही देखा गया है।
अन्य जिलों में महाग्राम योजना की स्थिति
कुल प्रगति: महाग्राम योजना की सूची में प्रदेश के कुल 31 गांवों में काम प्रगति पर हैं, जबकि 29 गांवों में काम पूरी तरह से पूरा हो चुका है।
सफलता के उदाहरण: महेंद्रगढ़ जिले के सतनाली में 18 अक्टूबर 2024 को ही काम पूरा किया जा चुका है। वहीं भिवानी जिले के बहल और बापौड़ा तथा रोहतक के निदाना में काम पूरा करने की समयसीमा 31 मार्च 2028 निर्धारित है। भिवानी के बहल में 87.93 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले 54.97 करोड़ रुपये और बापौड़ा में 45.12 करोड़ रुपये की लागत के मुकाबले 19.24 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी?
कार्यकारी अभियंता अमित जैन ने जानकारी दी है कि महेंद्रगढ़ का सतनाली महाग्राम में शामिल है, जहाँ महाग्राम को लेकर जो बजट मिला था, उसे पूरा खर्च किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे जनसंख्या की मांग के अनुसार ही दोबारा से डिमांड भेजी जाएगी, ताकि आवश्यकतानुसार और अधिक विकास कार्य करवाए जा सकें।

