Yuva Haryana: हरियाणा में धान और बाजरा समेत खरीफ फसलों का खरीद सीजन जोरों पर है। हालांकि, प्रदेश की मंडियों में सबसे प्रमुख फसल—धान और बाजरा की आवक के साथ ही भंडारण का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। राज्य के कवर्ड और अनकवर्ड गोदामों में पहले से ही क्षमता से अधिक खाद्यान्न भरा पड़ा है, जिसके कारण नए धान को खुले में रखने की नौबत आ गई है।
गोदामों में पहले से ही 140 लाख टन का स्टॉक
वर्तमान में प्रदेश के गोदामों में 140 लाख टन से अधिक अनाज भरा हुआ है। इसमें शामिल हैं:
गेहूं: 96 लाख टन
चावल: 44 लाख टन से अधिक
विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि यदि इस पुराने स्टॉक के उठान (मूवमेंट) के प्रयास तुरंत शुरू भी किए जाएं, तब भी इसमें काफी समय लगेगा।
58 लाख टन धान की खरीद का अनुमान
इस सीजन में प्रदेश की मंडियों से लगभग 58 लाख टन धान की खरीद होने का अनुमान है।
हालांकि मंडियों से यह धान सीधे चावल मिलों (राइस मिलर्स) में जाएगा, लेकिन मिलों द्वारा तैयार किए जाने वाले लगभग 32 लाख टन चावल के भंडारण की भी आवश्यकता होगी।
सरकार की तैयारी: 90 वैकल्पिक स्थानों की तलाश
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी अमनीत पी. कुमार के अनुसार, संबंधित जिला प्रशासन ने प्रदेश भर में 90 ऐसे स्थानों की पहचान की है जहाँ नए धान का सुरक्षित भंडारण किया जा सके।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कड़े निर्देश जारी किए थे कि धान के सुरक्षित भंडारण के लिए नए स्थान तलाशे जाएं। इसके बाद सभी जिलों के उपायुक्तों (DC) को तुरंत ऐसे स्थान चिह्नित कर विभाग को सूचित करने के आदेश दिए गए हैं।
FCI से उठान में तेजी लाने की मांग
“गोदामों और खुले में पड़े गेहूं व चावल के उठान के लिए आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में एफसीआई (FCI) से पुनः संपर्क किया जाएगा ताकि नया चावल सुरक्षित तरीके से रखा जा सके।” -राजेश नागर, खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री, हरियाणा

