Yyva Haryana: धान खरीद का सीजन समाप्ति की ओर है, लेकिन प्रदेश में अब तक 36.73 प्रतिशत रकबे के सत्यापन का डेटा ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाया है। इसके बावजूद किसानों ने मंडियों में धान बेचा, जिससे यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि पोर्टल पर डेटा अपलोड न होने के बावजूद किसानों के गेट पास कैसे काटे गए?
प्रदेश में केवल 63.27 प्रतिशत रकबे का हुआ सत्यापन डेटा अपलोड
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. जसविंद्र सिंह सैनी ने जानकारी दी है कि इस साल प्रदेश में किसानों ने करीब 90,71,683 एकड़ धान के रकबे का पंजीकरण कराया था। इनमें से 10,83,176 किसानों के 57,39,605 एकड़ रकबे के सत्यापन का डेटा ही पोर्टल पर अपलोड किया जा सका, जो कुल पंजीकृत रकबे का 63.27 प्रतिशत है। शेष 33,32,078 एकड़ का डेटा तकनीकी दिक्कतों के चलते अपलोड नहीं हो सका। ऐसे किसानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर कच्चे गेट पास के माध्यम से धान बिकवाया गया।
किसानों को उठानी पड़ी परेशानी और दूसरे के गेट पास का सहारा
पटवारियों ने 30 सितंबर तक खेतों में जाकर फसल का सत्यापन किया था, जिसके बाद डेटा पोर्टल पर अपलोड होना था। कृषि अधिकारियों के अनुसार, 29 सितंबर के बाद से पोर्टल में बार-बार तकनीकी दिक्कतें आईं और वह ज्यादातर समय बंद रहा। किसानों (रविंद्र, बब्लू औरपिंदर) ने बताया कि सत्यापन के बाद भी डेटा अपलोड न होने से उन्हें गेट पास जारी कराने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई किसानों को मजबूरी में दूसरे किसानों के गेट पास पर धान बेचना पड़ा, तो कुछ ने निजी आढ़तियों को कम दाम पर अपनी फसल बेच दी। इससे मिसमैच की स्थिति पैदा हुई और पूरी खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई।
पिछले साल सामने आया था बड़ा खरीद घोटाला
गौरतलब है कि पिछले साल तकनीकी खामियों का फायदा उठाकर मंडियों में धान लाए बिना ही कागजों पर फर्जी खरीद दर्ज करने का मामला सामने आया था। आरोप था कि पड़ोसी राज्यों (बिहार और उत्तर प्रदेश) के आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कर ई-खरीद पोर्टल पर फर्जी गेट पास बनाए गए और फिर कागजों में खरीद-मिलिंग दिखा कर सरकारी एजेंसियों से करोड़ों रुपये के क्लेम हासिल किए गए। इस बार सरकार ने खरीद प्रक्रिया को डिजिटल और जियो-फेंसिंग से जोड़कर पारदर्शी बनाने का प्रयास किया था, लेकिन सत्यापन डेटा समय पर अपलोड न होने के कारण किसानों को एक बार फिर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
पिहोवा में 100 करोड़ रुपये का धान घोटाला होने का दावा
दूसरी ओर, कुरुक्षेत्र में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रवक्ता प्रिंस वड़ैच ने बुधवार को जाट धर्मशाला में प्रेसवार्ता के दौरान बड़ा दावा करते हुए कहा कि अकेले पिहोवा क्षेत्र में ही 100 करोड़ रुपये से अधिक का धान घोटाला उजागर हो सकता है।

