हरियाणा के सिरसा, भिवानी और हिसार में पॉलीहाउस बीमा मामले की विजिलेंस जांच, किसानों ने लगाए गंभीर आरोप
Yuva Haryana: हरियाणा के सिरसा, भिवानी और हिसार जिलों में पॉलीहाउस और नेट हाउस लगाने वाले किसानों को बीमा क्लेम नहीं मिलने की शिकायतों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। किसानों की शिकायतों और बागवानी विभाग की जांच में सामने आए तथ्यों के बाद सरकार ने संबंधित निजी कंपनी के कामकाज की विजिलेंस जांच कराने का फैसला लिया है। जांच पूरी होने तक कंपनी को आगामी आदेशों तक नया काम नहीं करने दिया जाएगा। इस मामले में किसानों ने बीमा पॉलिसी, प्रीमियम और कथित फर्जी रसीदों को लेकर सवाल उठाए हैं।
हरियाणा में किसानों को संरक्षित खेती यानी पॉलीहाउस और नेट हाउस लगाने के लिए सरकार की ओर से अनुदान दिया जाता है। इन संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव में लाखों रुपये खर्च होते हैं। ऐसे में आंधी, तूफान, आग या अन्य नुकसान होने पर बीमा क्लेम किसानों के लिए बड़ी आर्थिक मदद होता है। लेकिन तीन जिलों के किसानों का आरोप है कि नुकसान होने के बाद भी उन्हें बीमा राशि नहीं मिली।
सिरसा के किसान ने 28 लाख रुपये खर्च कर लगाया नेट हाउस
सिरसा जिले के आसाखेड़ा निवासी किसान संदीप कुमार ने वर्ष 2024-25 में सरकारी अनुदान के तहत नेट हाउस लगवाया था। इस पर करीब 28 लाख रुपये खर्च हुए। किसान का आरोप है कि निर्माण के कुछ समय बाद ही नेट की जाली फट गई। तेज हवा और तूफान के कारण ढांचा भी क्षतिग्रस्त हो गया।
किसान ने नुकसान के बाद बीमा कंपनी से क्लेम मांगा, लेकिन उसके अनुसार भुगतान नहीं किया गया। संदीप कुमार ने आरोप लगाया कि नेट हाउस लगाने के लिए जिन लोगों और एजेंसी पर भरोसा किया गया था, उन्होंने नुकसान के बाद जिम्मेदारी नहीं निभाई। इस मामले में किसान ने विभाग से शिकायत की और जांच की मांग उठाई।
27 से 30 लाख रुपये तक आती है लागत
पॉलीहाउस और नेट हाउस आधुनिक खेती के महत्वपूर्ण साधन हैं। इनके जरिए किसान मौसम के प्रभाव को कम करके सब्जियों और दूसरी बागवानी फसलों का उत्पादन कर सकते हैं। हालांकि, इन संरचनाओं को तैयार करने में करीब 27 से 30 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है।
हरियाणा सरकार की योजनाओं के तहत पात्र किसानों को अनुदान दिया जाता है। अखबार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार, सामान्य वर्ग के किसानों को 65 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के किसानों को 85 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। सरकारी सहायता के बावजूद किसान को अपनी ओर से भी बड़ी रकम लगानी पड़ती है। इसलिए बीमा सुरक्षा और समय पर क्लेम मिलना बेहद जरूरी है।
भिवानी में आग से जला नेट हाउस, क्लेम नहीं मिलने की शिकायत
भिवानी जिले के मिताथल गांव के एक किसान ने भी बीमा भुगतान नहीं मिलने की शिकायत की है। किसान ने वर्ष 2020 में नेट हाउस स्थापित किया था। इसके बाद वर्ष 2022 में गेहूं की फसल में आग लगने की घटना के दौरान नेट हाउस भी जल गया।
किसान ने नुकसान की भरपाई के लिए बीमा क्लेम किया, लेकिन उसका कहना है कि उसे भुगतान नहीं मिला। इस मामले में भी विभाग के सामने शिकायत रखी गई। किसानों का कहना है कि जब बीमा प्रीमियम और पॉलिसी से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी की गई थीं, तो नुकसान के बाद क्लेम देने में देरी या इनकार क्यों किया गया?
107 बीमा रसीदों में 70 के फर्जी होने का आरोप
किसान अशोक ने वर्ष 2018 से 2026 तक बीमा से संबंधित दस्तावेज और करीब 107 रसीदों का ब्यौरा अधिकारियों को दिया है। किसान का आरोप है कि जब वह संबंधित निजी एजेंसी के कोलकाता स्थित मुख्यालय पहुंचा, तो उसे बताया गया कि इनमें से 70 बीमा रसीदें फर्जी हैं।
इस मामले में किसान ने एजेंसी से लिखित जवाब भी मांगा। अब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित रसीदें किसने जारी कीं, बीमा पॉलिसियां वास्तव में सक्रिय थीं या नहीं और किसानों से ली गई रकम का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
बागवानी विभाग की जांच के बाद सरकार का फैसला
हरियाणा उद्यान विभाग के मिशन निदेशक मनोज कुमार के अनुसार, तीन जिलों के किसानों की शिकायतें विभाग तक पहुंची थीं। विभाग ने इन शिकायतों की जांच कराई और संबंधित बीमा एजेंसी को अपना पक्ष रखने के लिए 21 अगस्त को चंडीगढ़ बुलाया था। हालांकि, एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद विभाग ने कोलकाता स्थित मुख्यालय को पत्र भेजकर किसानों की ओर से जमा कराई गई रसीदों की पुष्टि करने को कहा।
अब सरकार ने मामले में विजिलेंस जांच के निर्देश दिए हैं। जांच का मुख्य उद्देश्य किसानों की शिकायतों की सत्यता, बीमा पॉलिसियों की स्थिति और निजी एजेंसी की भूमिका का पता लगाना है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किसानों को बीमा क्लेम क्यों नहीं मिला और कथित फर्जी रसीदों के पीछे किसकी जिम्मेदारी है।

