अंबाला में 800 करोड़ के शहीद स्मारक का अमित शाह ने किया उद्घाटन, 1857 की क्रांति के 700 से ज्यादा बलिदानियों के नाम दर्ज
Yuva Haryana: हरियाणा के अंबाला छावनी में 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वीर बलिदानियों की याद में बनाए गए भव्य शहीद स्मारक का गुरुवार, 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्घाटन किया। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह स्मारक देश की आजादी की पहली लड़ाई में योगदान देने वाले ज्ञात-अज्ञात क्रांतिकारियों और शहीदों को समर्पित है। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सहित कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे।
‘आजादी की पहली लड़ाई का शहीद स्मारक’ नाम से विकसित इस परिसर में 1857 के विद्रोह से जुड़े इतिहास को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है। यहां 700 से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों के नाम स्वर्णिम अक्षरों में अंकित किए गए हैं। स्मारक का उद्देश्य उन लोगों के योगदान को सामने लाना है, जिनकी कुर्बानियों को इतिहास के लोकप्रिय वर्णनों में अपेक्षाकृत कम जगह मिली।
22 एकड़ में बना है भव्य स्मारक
अंबाला छावनी में दिल्ली-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे के पास लगभग 22 एकड़ क्षेत्र में यह स्मारक विकसित किया गया है। इसके निर्माण में करीब आठ साल का समय लगा। परिसर में कुल 23 गैलरी बनाई गई हैं, जिनमें 1857 के विद्रोह से जुड़ी घटनाओं और अलग-अलग क्षेत्रों में हुए संघर्षों को दिखाया गया है।
इन गैलरी में अंबाला, मेरठ, दिल्ली, पंजाब, गुजरात, झांसी और देश के दूसरे हिस्सों में हुए घटनाक्रमों को शामिल किया गया है। ऐतिहासिक दस्तावेजों, डिजिटल प्रदर्शनियों और आधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीक के जरिए दर्शकों को उस दौर की परिस्थितियों से परिचित कराने की व्यवस्था है।
स्मारक परिसर में 63 मीटर ऊंची कमल के आकार की संरचना भी बनाई गई है। इसके अलावा 360 डिग्री प्रोजेक्शन सिस्टम, लेजर और साउंड शो, इंटरैक्टिव डिस्प्ले, ओपन एयर थिएटर और ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
6 नवंबर से आम लोगों के लिए खुलेगा
उद्घाटन समारोह के बाद यह स्मारक शुक्रवार, 6 नवंबर से आम जनता के लिए खोलने की तैयारी है। यहां विद्यार्थी, शोधकर्ता, इतिहास में रुचि रखने वाले लोग और पर्यटक 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी जानकारियां देख सकेंगे।
हरियाणा सरकार की योजना है कि प्रदेश के विद्यार्थियों को भी इस स्मारक का भ्रमण कराया जाए, ताकि नई पीढ़ी स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और बलिदानियों के योगदान को करीब से समझ सके। इससे अंबाला में ऐतिहासिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने पहले ही स्मारक तक पर्यटकों की पहुंच आसान बनाने के लिए विशेष बस सेवा शुरू करने की योजना का उल्लेख किया था। प्रस्तावित पर्यटन बस के जरिए स्मारक के साथ शहर के अन्य प्रमुख स्थलों को भी जोड़ा जा सकता है।
1857 की क्रांति में अंबाला की भूमिका पर खास जोर
स्मारक का एक प्रमुख उद्देश्य 1857 के विद्रोह में अंबाला छावनी की भूमिका को सामने लाना है। आम तौर पर 10 मई 1857 को मेरठ से शुरू हुए विद्रोह को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत के रूप में पढ़ाया जाता है। हालांकि, अंबाला से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों और शोध के आधार पर यहां यह पक्ष भी प्रदर्शित किया गया है कि अंबाला छावनी में सैनिकों के बीच विद्रोह की गतिविधियां मेरठ की घटना से पहले शुरू हो चुकी थीं।
इतिहासकारों और ब्रिटिश अधिकारियों के पुराने अभिलेखों में अंबाला में मार्च से मई 1857 के बीच असंतोष, आगजनी और सैनिकों की गतिविधियों का उल्लेख मिलता है। अंबाला में तैनात 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों ने भी अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह किया था। इस संघर्ष को दबाने के दौरान बड़ी संख्या में सैनिकों को मौत के घाट उतारा गया और कई लोगों को सजा दी गई।
हरियाणा के पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
अंबाला में इस स्मारक के खुलने से राज्य के ऐतिहासिक पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। यहां आने वाले पर्यटक स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी घटनाओं को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय आधुनिक तकनीक के माध्यम से अनुभव कर सकेंगे।
सरकार को उम्मीद है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के आने से स्थानीय व्यापार, परिवहन और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा। करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह स्मारक हरियाणा की प्रमुख ऐतिहासिक और पर्यटन परियोजनाओं में शामिल हो गया है।

