Yuva Haryana: करनाल एसबीआई बैंक में हुए 8.48 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में पंचकूला सीबीआई कोर्ट ने कैथल निवासी सुशील कुमार गर्ग को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी के उन सभी तर्कों को खारिज कर दिया, जिनमें मामले को केवल सिविल विवाद बताया गया था। सीबीआई जांच में फर्जी बैलेंस शीट, पत्नी के नाम पर शेल कंपनियां बनाने और बैंक खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी का खुलासा हुआ।
2015 में लिया था 10 करोड़ का एसेट बैंक लोन
सीबीआई जांच के मुताबिक, सुशील गर्ग ने वर्ष 2015 में एसबीआई से 10 करोड़ रुपये का एसेट बैंक लोन लेने के लिए फर्जी और मनगढ़ंत बैलेंस शीट पेश की। इसमें फर्म की वास्तविक कैपिटल करीब 45.98 लाख रुपये होने के बावजूद उसे बढ़ाकर 97.35 लाख रुपये दिखाया गया।
आरोपी ने अपनी पत्नी पूनम गर्ग के नाम पर पूनम राइस मिल और मेसर्स वर्धमान एक्सपोर्ट्स जैसी कंपनियां भी बनाई थीं, जिनका कोई वास्तविक अस्तित्व नहीं था।
8.67 करोड़ रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर
जांच में सामने आया कि आरोपी ने पूनम राइस मिल और जेपी वंशल के नाम पर फर्जी एडवांस दिखाकर करीब 8.67 करोड़ रुपये लोन अकाउंट से निकाल लिए। इसके बाद यह रकम पत्नी के बचत खाते और अन्य संबंधित खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
जांच में सामने आए प्रमुख फर्जीवाड़े
- फर्जी बैलेंस शीट: बैंक से लोन लेने के लिए वास्तविक पूंजी से अधिक राशि दिखाई गई।
- पत्नी के नाम पर शेल फर्म: ऐसी फर्में बनाई गईं जिनका वास्तविक अस्तित्व नहीं था।
- फर्जी बिलिंग: बिना माल की वास्तविक आवाजाही के करोड़ों रुपये की खरीद-बिक्री दिखाई गई।
- गलत संपत्ति दस्तावेज: बैंक को बंधक रखी गई जमीन की गलत नगर परिषद आईडी दी गई।
- कागजों पर करोड़ों का कारोबार: सीबीआई जांच में शेल कंपनियों के जरिए करीब 22.68 करोड़ रुपये का फंड रोटेशन सामने आया।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2015-16 में एक ही दिन में कई लेनदेन कागजों पर दिखाए गए थे। बिना जीएसटी नंबर वाली फर्मों के नाम पर भी करीब 4.03 करोड़ रुपये की फर्जी देनदारी दर्ज की गई थी।
बैंक खाते हुए थे NPA
आरोपी ने लोन की रकम को निर्धारित कारोबार में इस्तेमाल करने के बजाय दूसरे खातों में डायवर्ट किया। इसके चलते 28 मई 2018 को बैंक ने खाते को NPA घोषित कर दिया था और करीब 8.48 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित थी।

