By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Yuva HaryanaYuva HaryanaYuva Haryana
Notification Show More
Font ResizerAa
  • Home
  • आज की ताजा खबर
  • हरियाणा न्यूज़
  • हरियाणा सरकार
  • भारत
  • स्वास्थ्य एवं जीवनशैली
  • खेल खिलाड़ी
  • राजनीति
  • सोशल-वायरल
  • कृषि
  • धर्म
  • अन्य
  • मनोरंजन
Reading: कैथल के बलवान सिंह ने भारत को एशियन गेम्स में चौथी बार दिलवाया गोल्ड
Share
Font ResizerAa
Yuva HaryanaYuva Haryana
Search
  • Home
  • आज की ताजा खबर
  • हरियाणा न्यूज़
  • हरियाणा सरकार
  • भारत
  • स्वास्थ्य एवं जीवनशैली
  • खेल खिलाड़ी
  • राजनीति
  • सोशल-वायरल
  • कृषि
  • धर्म
  • अन्य
  • मनोरंजन
Have an existing account? Sign In
Follow US
खेल खिलाड़ीहरियाणा न्यूज़

कैथल के बलवान सिंह ने भारत को एशियन गेम्स में चौथी बार दिलवाया गोल्ड

Yuva Haryana
Last updated: September 28, 2026 5:23 pm
Yuva Haryana
Published: September 28, 2026
Share
SHARE

कैथल जिले के छोटे से गांव के बलवान सिंह के नाम हैं वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, प्रो-कबड्डी और ढेरों अन्य अंतर्राष्ट्रीय खेलों में गोल्ड मैडल

Yuva Haryana : 26 सितंबर 2026 को जापान के आइची-नागोया में जब भारत ने ईरान को 40-34 से हराकर एशियन गेम्स का स्वर्ण जीता, तो भारतीय खिलाड़ियों के साथ एक चेहरा और चर्चा में था—मुख्य कोच बलवान सिंह। भारत ने मुकाबले में पहले हाफ में 17-18 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी की और खिताब बरकरार रखा। लेकिन बलवान सिंह की यह सफलता अचानक नहीं आई है। इसके पीछे हरियाणा के एक छोटे से गांव का बचपन, खेती, कुश्ती-कबड्डी की परंपरा और चार दशक से अधिक लंबा खेल जीवन है।

कैथल जिले के कलायत क्षेत्र के गांव ढुंढवा में खेतों के बीच पले-बढ़े बलवान सिंह आज भारतीय कबड्डी के सबसे अनुभवी और सफल प्रशिक्षकों में शामिल हैं। 2026 एशियन गेम्स में उनकी वापसी ने एक बार फिर इतिहास रचा—भारत ने ईरान को 40-34 से हराकर पुरुष कबड्डी का स्वर्ण पदक जीता। कबड्डी में उन्होंने 1981 से 1993 तक उच्च स्तर पर खेला और अपने खेल करियर में नौ स्वर्ण पदक जीते। इसके बाद उन्होंने कोचिंग की दिशा में कदम बढ़ाया और कोचिंग का प्रशिक्षण हासिल किया। उनके अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जीवन में 1988 की एशियन कबड्डी चैंपियनशिप और 1989 के SAF Games का उल्लेख मिलता है। इसके बाद कोच के रूप में उनका सफर और अधिक प्रभावशाली होता चला गया।

भारत को तीन बार विश्व कप जितवाने वाले कोच बलवान सिंह

2003 में मिली राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी
दिसंबर 2003 में बलवान सिंह को भारतीय पुरुष कबड्डी टीम का राष्ट्रीय कोच नियुक्त किया गया। इसके बाद भारतीय कबड्डी में उनका सबसे स्वर्णिम दौर शुरू हुआ। उन्होंने भारत को 2006 दोहा, 2010 ग्वांगझू और 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक दिलाने वाली टीमों को कोच किया। 2026 में फिर भारतीय टीम के मुख्य कोच के रूप में लौटने से पहले ही उनके खाते में तीन एशियन गेम्स गोल्ड और तीन कबड्डी विश्व कप खिताब शामिल थे। 2026 की वापसी के साथ उनके एशियन गेम्स के कोचिंग रिकॉर्ड में एक और स्वर्ण जुड़ गया।

हरियाणा पुलिस में 20 हजार से ज्यादा भर्तियां, DGP अजय सिंघल ने गुरुग्राम में किया बड़ा ऐलान

विश्व कप से लेकर प्रो कबड्डी तक जीत के परचम
बलवान सिंह का प्रभाव एशियन गेम्स तक सीमित नहीं रहा। वह भारत की 2004, 2007 और 2016 विश्व कप विजेता टीमों से जुड़े रहे। 2026 एशियन गेम्स से पहले प्रो कबड्डी ने उनके अंतरराष्ट्रीय कोचिंग रिकॉर्ड में 14 अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदकों का उल्लेख किया था। प्रो कबड्डी लीग के आने के बाद उन्होंने पेशेवर कबड्डी में भी अपनी छाप छोड़ी। वह जयपुर पिंक पैंथर्स के कोच रहे और टीम को लीग के शुरुआती दौर में खिताबी सफलता मिली। 2016 में टीम के साथ काम करते हुए उन्होंने बताया था कि उनका कोचिंग तरीका खिलाड़ियों को मानसिक रूप से सहज रखना और टीम में हर खिलाड़ी को महत्वपूर्ण महसूस कराना था।

 

हरियाणा में सरकारी भुगतान में देरी पर अब मिलेगा ब्याज, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिए निर्देश

 

द्रोणाचार्य पुरस्कार ने बढ़ाया सम्मान
भारतीय कबड्डी में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2005 में द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हरियाणा से जुड़े द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेताओं की सूची में भी बलवान सिंह का नाम कबड्डी के लिए 2005 के पुरस्कार विजेता के रूप में दर्ज है।

कलायत क्षेत्र के ढुंढवा गांव में बीता बचपन
हरियाणा के गांवों में खेल और खेती अक्सर जिंदगी के दो अलग रास्ते नहीं होते। खेत में काम करने वाला शरीर ही शाम को अखाड़े या कबड्डी के मैदान में उतरता है। कैथल के कलायत क्षेत्र के गांव ढुंढवा के बलवान सिंह का जीवन इसी ग्रामीण खेल संस्कृति से निकली उस कहानी का उदाहरण है, जिसने उन्हें भारतीय कबड्डी की राष्ट्रीय टीम के सबसे सफल कोचों में पहुंचाया। बलवान सिंह का जन्म 1959 में कैथल जिले के गांव ढुंढवा में हुआ। उनके पिता हरी सिंह खेती करते थे और परिवार के साथ बलवान सिंह भी खेतों के काम में हाथ बंटाते थे। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल से नौवीं कक्षा तक की और दसवीं की पढ़ाई पास के गुलियाना गांव से पूरी की। उनका बचपन आज के बच्चों से काफी अलग था। न आधुनिक खेल सुविधाएं थीं, न खेल के इतने विकल्प। खुद बलवान सिंह ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उनके इलाके में बच्चों के लिए मुख्य खेल कुश्ती और कबड्डी ही थे। गांव के बच्चे इन्हीं खेलों के साथ बड़े होते थे और वह भी बचपन से इन दोनों खेलों में शामिल रहे। उनके परिवार की भी खेल पृष्ठभूमि थी। बलवान सिंह ने प्रो कबड्डी को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि उनके दादा पहलवान थे और उन्होंने भी शुरुआत में कुश्ती की थी। बाद में गर्दन की चोट के कारण उन्हें कुश्ती छोड़कर कबड्डी की ओर जाना पड़ा। यही चोट आगे चलकर उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुई।

दस साल बाद राष्ट्रीय टीम में वापसी
2026 एशियन गेम्स के लिए बलवान सिंह की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण थी क्योंकि वह एक दशक बाद भारतीय पुरुष राष्ट्रीय टीम के मुख्य कोच के रूप में एशियन गेम्स में लौटे। उनके पिछले एशियन गेम्स अभियान 2006, 2010 और 2014 में भारत ने स्वर्ण जीता था। इस बार उनके सामने एक बदली हुई टीम थी। भारतीय पुरुष टीम में कई खिलाड़ी एशियन गेम्स में पहली बार खेल रहे थे। इसके बावजूद भारत ने पूरा अभियान जीत के साथ समाप्त किया और फाइनल में ईरान को 40-34 से हराया।

न्यूनतम वेतनमान पर हरियाणा सरकार को हाई कोर्ट से झटका, कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

ढुंढवा से दुनिया तक
बलवान सिंह की कहानी को केवल एक सफल कोच की कहानी कहना शायद अधूरा होगा। इसमें हरियाणा के ग्रामीण खेल-संस्कार की एक पूरी तस्वीर दिखाई देती है—सुबह खेत, गांव का स्कूल, मिट्टी का खेल मैदान, कुश्ती और कबड्डी, चोट के बाद खेल बदलना, खिलाड़ी से प्रशिक्षक बनना और फिर देश की राष्ट्रीय टीम को विश्व और एशियाई मंच पर स्वर्ण तक पहुंचाना। कलायत के ढुंढवा की जिस मिट्टी में कभी एक किसान परिवार का बच्चा कबड्डी और कुश्ती खेलता था, उसी गांव का नाम आज भारतीय कबड्डी की स्वर्णिम गाथा के साथ जुड़ा हुआ है। बलवान सिंह के लिए 2026 का एशियन गेम्स स्वर्ण केवल एक और पदक नहीं है। यह उस सफर की नई कड़ी है, जिसकी शुरुआत हरियाणा के एक छोटे से गांव में कबड्डी के मैदान से हुई थी।

You Might Also Like

हरियाणा के इस जिले में बसेगा नया सैटेलाइट शहर, होलसेल की बड़ी मार्केट बनाने पर भी सरकार कर रही काम, पढ़ें
हरियाणा के लिंगानुपात में लंबी छलांग, इस जिले में बेटियां सबसे ज्यादा जन्म ले रहीं
हरियाणा में बाढ़ प्रभावितों को मिला मुआवजा, सबसे ज्यादा नुकसान इन जिलों में हुआ, देखें
हरियाणा में दो साल से ग्रुप-सी, डी की नई भर्ती नहीं, सीईटी पास युवा कर रहे मजदूरी
हरियाणा के सिरसा में ग्रेनेड अटैक, इस पाकिस्तानी गैंगस्टर ने ली जिम्मेदारी
TAGGED:Asian Games 2026Balwan SinghDhundhwa VillageDronacharya AwardHaryana KabaddiHaryana NewsHaryana SportsIndia KabaddiIndian KabaddiKabaddi CoachKabaddi Gold MedalKabaddi World CupKaithal NewsKalayat NewsPro KabaddiSports Newsएशियन गेम्स 2026कबड्डी कोचकलायतकैथल न्यूजढुंढवा गांवद्रोणाचार्य पुरस्कारबलवान सिंहभारतीय कबड्डीहरियाणा खेल
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a ReplyCancel reply

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe

Weekly Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!
[mc4wp_form]
Popular News
आज की ताजा खबरहरियाणा न्यूज़

हरियाणा में बार काउंसिल चुनावों की घोषणा, तैयारी में जुटा प्रशासन

Yuva Haryana
Yuva Haryana
December 26, 2025
CM ममता बनर्जी के एक बयान पर देश में गरमाई सियासत, हरियाणा के इस नेता ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
झज्जर एनकाउंटर केस में अब खापों की हुई एंट्री, दोनों पक्षों ने दिया ये अल्टीमेटम, पढ़ें पूरा मामला
कांग्रेस में छिड़ी पोस्टर ‘वॉर’, सांसद कुमारी सैलजा का बड़ा पोस्टर हटाने पर हुआ विवाद
क्रिकेटर शेफाली वर्मा का सम्मान, इतने करोड़ का कैश अवार्ड, नौकरी और बनीं ब्रांड एंबेसडर
Global Coronavirus Cases

Confirmed

0

Death

0

More Information:Covid-19 Statistics
© Yuva Haryana. All Rights Reserved.

Loading Comments...

    Welcome Back!

    Sign in to your account

    Username or Email Address
    Password

    Lost your password?