Yuva Haryana : हरियाणा में प्राइवेट विश्वविद्यालयों पर हरियाणा सरकार शिकंजा कसने की जोर-शोर से तैयारी कर रही है। दरअसल, प्रदेश सरकार जल्द एक विधेयक लेकर आ रही है, जिससे निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी नहीं चलेगी।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार नए कानून के अनुसार निजी विश्वविद्यालय बिना अनुमति के न तो पाठ्यक्रम शुरू कर पाएंगे और न ही क्षमता से ज्यादा प्रवेश करवा पाएंगे। इतना ही नहीं विश्वविद्यालयों के प्रबंधन पर भी सरकार का पूरा कंट्रोल रहेगा।
जानकारी के अनुसार राज्य सरकार हरियाणा निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2025 ला रही है। इस विधेयक में क्या-क्या कानून शामिल किए गए है ? चलिए आपको बताते हैं…
नए विधेयक में क्या ?
- सरकार के पास होगी प्रशासक नियुक्त करने की शक्ति
- सरकार को एक करोड़ रुपये तक जुर्माने लगाने और प्रबंधन भंग करने का अधिकार होगा
- निजी विश्वविद्यालय अपनी मर्जी से नए पाठ्यक्रम शुरू नहीं कर सकेगा
- क्षमता से अधिक प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी
- पाठ्यक्रमों से छेड़छाड़ करके विद्यार्थियों और अभिभावकों को गुमराह नहीं किया जा सकेगा
कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी ?
हरियाणा सरकार ने फरीदाबाद की अल फलाह विश्वविद्यालय में देशविरोधी गतिविधियां और वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद यह सख्ती करने का फैसला लिया है। दरअसल, नई दिल्ली में लाल किले के पास हुए बम धमाके के बाद जांच के घेरे में आए अल फलाह विश्वविद्यालय ने पुराने कानून में कमियों का ही फायदा उठाया था।
जानकारी के अनुसार अल फलाह साल 2013 में स्थापित हुई थी। स्थापना के 12 साल बाद भी अल फलाह ने अभी तक राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद से मान्यता नहीं ली। इसके तीन कालेजों में से दो को मान्यता मिली, लेकिन मान्यता खत्म होने के बाद नवीनीकरण नहीं हुआ। फिलहाल, वित्तीय गड़बड़ी और फंडिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है।
आपको ये भी बता दें कि पुराने कानून में विश्वविद्यालय के लिए जारी नियमों की जांच को लेकर सरकार के पास कोई उचित तंत्र नहीं है। ऐसे में नियमों का पालन कराने के लिए भी सख्ती नहीं हो पा रही है।
ऐसे में अब नए कानूनों के अनुसार विशेष परिस्थितियों में प्रदेश सरकार इन निजी विश्वविद्यालयों में प्रशासक नियुक्त कर सकती है। प्रशासक को अपने हिसाब से विश्वविद्यालय की आर्थिक और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने और मान्यता रद्द करने के लिए सरकार को सिफारिश भेजने का अधिकार प्राप्त होगा।
इस कानून के अंतर्गत राज्य सरकार यदि किसी विश्वविद्यालय में प्रशासक नियुक्त करती है तो उसके अलावा अधिकतम पांच व्यक्तियों की एक समिति भी गठित कर सकती है। समिति को सिविल न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी।
इस समिति की रिपोर्ट पर कुलाधिपति, कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रायोजक निकाय को सात दिन का कारण बताओ नोटिस जारी का जवाब मांगा जा सकेगा। विश्वविद्यालय कर्तव्यों और दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करने की स्थिति में नहीं है तो सरकार जांच के बाद पाठ्यक्रम या अध्ययन कार्यक्रम को जारी रखने की अनुमति रद्द कर सकेगी।
एक बड़ी जानकारी ये भी है कि इस संशोधित विधेयक के साथ राज्य के उन 26 निजी विश्वविद्यालयों की सूची भी जोड़ी गई है, जिनमें प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है। इसमें फरीदाबाद का अल फलाह विश्वविद्यालय भी शामिल है।
विधेयक में इन 26 विश्वविद्यालयों के नाम
- अल फलाह विश्वविद्यालय फरीदाबाद
- मानव रचना विश्वविद्यालय फरीदाबाद
- श्री गुरु गोबिंद सिंह त्रि. शताब्दी विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- सुशांत विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- दी नॉर्थ कैंप विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- जीडी गोयनका विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- स्टारैक्स विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- आईआइएलएम विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- केआर मंगलम विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- एमिटी विश्वविद्यालय मानेसर गुरुग्राम
- एपीजे सत्य विश्वविद्यालय गुरुग्राम
- महर्षि मारकंडेश्वर विश्वविद्यालय अंबाला
- बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय रोहतक
- ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय सोनीपत
- एसआरएम विश्वविद्यालय सोनीपत
- अशोका विश्वविद्यालय सोनीपत
- विश्व डिजाइन विश्वविद्यालय सोनीपत
- ऋषि हुड विश्वविद्यालय सोनीपत
- एनआइआइएलएम विश्वविद्यालय कैथल
- एमवीएन विश्वविद्यालय पलवल
- पीडीएम विश्वविद्यालय झज्जर
- संस्कारम विश्वविद्यालय झज्जर
- जगन नाथ विश्वविद्यालय बहादुरगढ़
- ओम स्ट्रलिंग ग्लोबल विश्वविद्यालय हिसार
- गीता विश्वविद्यालय पानीपत



