Yuva Haryana: खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग में रिकवरी को लेकर कार्रवाई के अलग-अलग पैमाने अपनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। यमुनानगर चावल मिल की जमीन, शेड और मशीनरी को कब्जे में लेकर 1.85 करोड़ रुपये में नीलाम किया गया, जबकि दूसरे मामले में करीब 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले के सामने आने के बाद भी कार्रवाई की रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एक मामले में संपत्ति की नीलामी
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 26 मई 2026 को संचालक जावेद खान की किसान राइस मिल और न्यू किसान राइस मिल पट्टी की संपत्ति की नीलामी की। जमीन, शेड, मशीनरी और अन्य चल-अचल संपत्ति शामिल थी।
मामले में जगाधरी पुलिस ने अक्टूबर 2025 में केस दर्ज किया था। मलिकपुर खादर के पास राइस मिल की संपत्ति के लिए 1.85 करोड़ रुपये की सर्वोच्च बोली लगी, जबकि रिजर्व कीमत करीब 1.79 करोड़ रुपये थी।
70 करोड़ रुपये के धान घोटाले में रिकवरी पर सवाल
दूसरी ओर, छछरौली निवासी संदीप सिंगला की सात राइस मिलों से जुड़े मामले में स्टॉक में गड़बड़ी सामने आने के बाद केस दर्ज किया गया था। ईडीएफसी ने राइस मिल संचालक संदीप सिंगला, हेडक के सीनियर मैनेजर शैलेश कुमार और परचेज मैनेजर अनिल कुमार को गिरफ्तार किया था।
संदीप सिंगला को 27 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। विभाग की ओर से इंस्पेक्टर विनोद कुमार, सविता, मनोज यादव और एफएसओ देवेंद्र कुमार को बर्खास्त किया गया था।
डीएफएससी नितीश सिंगला का कहना है कि करीब 70 करोड़ रुपये के मामले में रिकवरी की प्रक्रिया अलग-अलग स्तर पर चल रही है।
एक ही परिसर में कई राइस मिलें, फिर भी निगरानी पर सवाल
मामले में एक ही परिसर में कई राइस मिलों के संचालन का भी उल्लेख है। बिलासपुर कोर्ट ने इस मामले में आरोपित पक्ष से पीडीआर मांगी थी। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि विभागीय निरीक्षण और भौतिक सत्यापन के बावजूद एक ही परिसर में कई मिलों का संचालन कैसे सामने आया।
70 करोड़ रुपये के धान घोटाले में गिरफ्तारी, बर्खास्तगी और जांच की कार्रवाई हुई, लेकिन रिकवरी की प्रक्रिया अभी जारी है।

