Yuva Haryana : हर बार इस समय प्रदूषण बढ़ने के चलते पराली जलाने का मुद्दा खासा गरमाया रहता है और हरियाणा व पंजाब के किसानों पर पराली जलाने के कारण प्रदूषण बढ़ने का आरोप लगाया जाता है।
ऐसे में हरियाणा सरकार ने एक बड़ा दावा किया है। सरकार के अनुसार इस बार प्रदेश में पराली जलाने के मामलों पर पूरा कंट्रोल रखा गया और इसके चलते इसमें 77 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
साथ ही सरकार ने दावा किया है कि हरियाणा अगले दो साल में पराली जलाने की समस्या को जड़ से खत्म कर देगा। सरकारी आंकड़े के अनुसार 6 नवम्बर 2025 तक राज्य में पराली जलाने की 206 घटनाएं दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल 2024 में इसी अवधि में यह संख्या 888 थी।
पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाने के लिए खास तौर पर करनाल और कुरुक्षेत्र जिले की सराहना हुई है।
आपको बता दें कि हरियाणा में पराली जलाने के मामलों पर कंट्रोल करने के लिए 10 हजार से ज्यादा नोडल अधिकारी तैनात किए गए है और हरसेक की सैटेलाइट निगरानी से वास्तविक समय में पराली जलाने की घटनाओं का पता लगाया जाता है। प्रत्येक सत्यापित घटना में एफआईआर दर्ज की जा रही है और पर्यावरण मुआवजा भी लगाया जा रहा है।
अब तक 87 मामलों में 4.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से 3.20 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है। इसके अलावा, 87 किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई है। जनवरी से अक्टूबर, 2025 के बीच एनसीआर क्षेत्र में वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट न होने के कारण 3,25,989 वाहनों के चालान जारी किए गए हैं।
इस वर्ष दर्ज कचरा जलाने की 169 घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई की गई है। गुरुग्राम और फरीदाबाद में 86 सीसीटीवी कैमरों से डंप साइट्स की निगरानी की जा रही है ताकि आग की किसी भी घटना पर तुरंत नियंत्रण पाया जा सके।
पराली का सदुपयोग करने के लिए सरकार की योजनाएं
- हरियाणा ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए त्रि-आयामी रणनीति अपनाई है, जिसमें पराली का इन-सिटू, एक्स-सिटू और पशु चारे के रूप में उपयोग शामिल है। राज्य के कुल 39.31 लाख एकड़ धान क्षेत्र में से 44.40 लाख टन अवशेष इन-सिटू, 19.10 लाख टन एक्स-सिटू, और 22 लाख टन चारे के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
- अब तक 19,670 एकड़ क्षेत्र का धान से फसल विविधीकरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, 1,74,064 एकड़ क्षेत्र में डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस तकनीक अपनाई गई है, जिससे पानी की बचत और पराली उत्पादन में कमी आई है।
- राज्य सरकार ने इन-सिटू और एक्स-सिटू प्रबंधन के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़, फसल विविधीकरण के लिए 8000 रुपये प्रति एकड़ और डीएसआर के लिए 4,500 रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जा रही है।
- इन योजनाओं के लिए कुल 471 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों को बायो-डीकम्पोजर पाउडर मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसे चैधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार द्वारा दो लाख एकड़ क्षेत्र में यह परियोजना लागू की जा रही है।
- चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 94 करोड़ रुपये की लागत से 7,700 से अधिक नई मशीनें स्वीकृत की गई हैं। इस योजना पर इस वर्ष कुल 250.75 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार का अंशदान 150.45 करोड़ रुपये और राज्य का 100.30 करोड़ रुपये है।
- राज्य में इस समय 8.17 लाख टन क्षमता के 31 पेलेटाइजेशन, ब्रीकेटिंग संयंत्र, 111.9 मेगावाट क्षमता के 11 बायोमास पावर प्लांट, एक 2जी इथेनॉल संयंत्र, 2 सीबीजी प्लांट और 5 थर्मल पावर प्लांट संचालित हैं, जो संयुक्त रूप से 16.64 लाख टन धान के पराली का उपयोग कर रहे हैं।
- गैर-एनसीआर जिलों में ईंट भट्ठों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 2025 तक 20 प्रतिशत और 2028 तक 50 प्रतिशत तक पराली आधारित पेलेट्स का उपयोग करें।



