Yuva Haryana : हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में हृदय रोगियों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई टेली-ईसीजी परियोजना अब महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकार ने एक स्टार्टअप के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य ग्रामीण स्वास्थ्य संस्थानों में टेली-ईसीजी मशीनें उपलब्ध कराई हैं।
इस सुविधा के जरिए मरीज अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ईसीजी करा सकते हैं और उसकी रिपोर्ट विशेषज्ञों तक भेजी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर मरीज को शुरुआती उपचार और आपातकालीन दवा देने के बाद उच्च स्वास्थ्य केंद्र में रेफर किया जाता है।
तीन मिनट से कम समय में ईसीजी रिपोर्ट
परियोजना के तहत ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में लगाए गए पोर्टेबल ईसीजी उपकरण स्मार्टफोन से जुड़े हैं। स्वास्थ्यकर्मी इनसे ईसीजी करने के बाद रिपोर्ट विशेषज्ञों तक भेज सकते हैं।
चिकित्सकों को ईसीजी के परिणाम तीन मिनट से कम समय में उपलब्ध हो जाते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को ईसीजी की रिपोर्ट के लिए बड़े अस्पतालों की यात्रा करने और लंबा इंतजार करने की जरूरत कम हुई है।
करीब 600 सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जुड़े
टेली-ईसीजी नेटवर्क के तहत हरियाणा के करीब 600 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को जोड़ा गया है। इनमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सब-डिविजनल अस्पताल और जिला अस्पताल शामिल हैं।
परियोजना के आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर तक 33,854 ईसीजी टेस्ट किए जा चुके थे और इनमें 1,342 गंभीर मामलों की पहचान की गई।
गंभीर मरीजों को समय पर रेफर
यमुनानगर के रानीपुर पीएचसी में भी इस सुविधा का इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां टेली-ईसीजी सेवा शुरू होने के बाद हृदय संबंधी समस्या वाले मरीजों की पहचान और उन्हें उच्च केंद्रों तक रेफर करने की प्रक्रिया में तेजी आई है।
गंभीर मरीजों को प्रारंभिक उपचार और जरूरी दवा देने के बाद जिला अस्पतालों या ऐसे उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा जाता है, जहां कैथेटराइजेशन, एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
जिला अस्पतालों में इमरजेंसी मौतों में कमी का दावा
स्वास्थ्य विभाग के पूर्व महानिदेशक डॉ. कुलदीप सिंह के अनुसार, जिला अस्पतालों के इमरजेंसी विभागों में मरीजों को स्थिर करने के बाद अस्पताल पहुंचाने से मौतों में करीब 20 फीसदी कमी देखी गई है।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि दिल के मरीजों के मामले में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र से बड़े अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला समय कम करना उपचार के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
दिल की बीमारी से हर साल लाखों मौतें
भारत में हर साल करीब 31 लाख लोगों की मौत हृदय संबंधी बीमारियों के कारण होती है। इनमें लगभग 60 फीसदी मौतें 40 से 69 वर्ष की उम्र के लोगों में होती हैं।
हार्ट अटैक के बाद शुरुआती समय में उपचार मिलने से मरीज के बचने और स्वस्थ होने की संभावना बेहतर हो सकती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर ईसीजी और शुरुआती चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
टेली-ईसीजी के साथ बेहतर रेफरल व्यवस्था की जरूरत
विशेषज्ञों ने टेली-ईसीजी सुविधा को महत्वपूर्ण शुरुआत बताते हुए कहा कि इसके साथ मेडिकल ट्रांसपोर्ट, विशेषज्ञों से टेली-सपोर्ट और उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफरल व्यवस्था को भी मजबूत करने की जरूरत है।
परियोजना के तहत तकनीकी उपकरणों के साथ स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण और सिस्टम के संचालन के लिए सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।

