बारिश से धान खराब होने पर सरकार चिंतित, फसल की सुरक्षा और उठान तेज करने के निर्देश
Yuva Haryana: हरियाणा में बारिश के कारण मंडियों में खुले में रखे धान के भीगने और फसल खराब होने की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को किसानों की उपज की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडियों के बाहर भी ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने में परेशानी न हो। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक में उन्होंने धान खरीद, उठान और बारिश से फसल को बचाने के इंतजामों पर चर्चा की।
हरियाणा की 249 मंडियों और खरीद केंद्रों में मंगलवार तक करीब 19.64 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी थी। धान की आवक बढ़ने के साथ ही मंडियों में फसल के भंडारण और समय पर उठान की चुनौती भी सामने आ रही है।
मंडियों में धान की आवक और उठान की स्थिति
प्रदेश की मंडियों में धान की खरीद जारी है, लेकिन उठान की गति धीमी होने से कई जगहों पर अनाज खुले में पड़ा है। ऐसे में बारिश होने पर धान के भीगने और उसकी गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
मंडियों में अब तक 19.64 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है। इसमें से करीब 12.42 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी थी। वहीं, लगभग 6.30 लाख मीट्रिक टन धान का उठान हुआ था। बाकी धान के सुरक्षित भंडारण और समय पर उठान को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत से तैयार हुई फसल की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। इसलिए खरीद से लेकर उठान तक की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
मंडियों के बाहर भी किए जाएं सुरक्षा के इंतजाम
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मंडियों में जगह कम पड़ने या अधिक आवक होने की स्थिति में वैकल्पिक स्थानों की पहचान की जाए। मंडियों के आसपास उपयुक्त जगहों पर धान रखने की व्यवस्था की जाए, ताकि किसानों को अपनी उपज खुले में रखने के लिए मजबूर न होना पड़े।
उन्होंने कहा कि जहां फसल रखी जा रही है, वहां बारिश से बचाव के लिए जरूरी प्रबंध किए जाएं। तिरपाल, ढकने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही किसानों को खरीद और उठान से संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े और मंडियों में व्यवस्था सुचारु बनी रहे।
13 लाख मीट्रिक टन धान मंडियों में पड़ा
प्रदेश की 13 एलएमटी धान मंडियों में अब तक 19.64 लाख मीट्रिक टन धान पहुंच चुका है। इनमें से 12.42 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी थी, जबकि करीब 6.30 लाख मीट्रिक टन धान का उठान किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, काफी मात्रा में धान अभी भी मंडियों में पड़ा हुआ था।
धान का समय पर उठान नहीं होने से भंडारण की जगह कम पड़ सकती है। बारिश की स्थिति में खुले में रखी फसल को नुकसान होने की आशंका भी बनी रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने खरीद एजेंसियों और संबंधित विभागों को आपसी तालमेल के साथ काम करने के निर्देश दिए।
बारिश और मौसम को लेकर अलर्ट
चंडीगढ़ और हरियाणा के मध्य क्षेत्रों में मौसम बदलने की संभावना जताई गई थी। रिपोर्ट में 14 और 15 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश और गरज-चमक की आशंका का उल्लेख किया गया है। 16 अक्टूबर के लिए भी कुछ इलाकों में अलर्ट जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
ऐसे मौसम में मंडियों में खुले में रखे धान की सुरक्षा और अधिक जरूरी हो जाती है। मुख्यमंत्री के निर्देशों का उद्देश्य यही है कि किसानों की फसल बारिश से खराब न हो और खरीद व उठान की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार का जोर धान खरीद व्यवस्था को सुचारु रखने, मंडियों के बाहर वैकल्पिक इंतजाम करने और किसानों की उपज को मौसम की मार से बचाने पर है।

